![]() |
| सिंगरौली; तालाब में उतरे अफसर, पानी पर संदेश: क्या श्रमदान से बदलेगी जल संरक्षण की तस्वीर? Aajtak24 News |
सिंगरौली - जल संरक्षण और पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन को जनभागीदारी से जोड़ने के उद्देश्य से जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान के अंतर्गत हर्रई तालाब में धार्मिक और सामाजिक सहभागिता के साथ श्रमदान कर जल संरक्षण का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के दौरान हर्रई तालाब में कलश यात्रा, कलश पूजन और जल अभिषेक का आयोजन किया गया। रीवा संभाग के कमिश्नर बीएस जामोद ने विधिवत पूजन-अर्चन कर श्रमदान किया और जल संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और ग्रामीणों की भागीदारी के साथ तालाब परिसर में साफ-सफाई और श्रमदान किया गया। इस दौरान जल स्रोतों के संरक्षण और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित करने का संकल्प भी लिया गया। अपने संबोधन में कमिश्नर ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज आधारित अभियान है, जिसमें हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से तालाबों, पारंपरिक जल संरचनाओं और पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भागीदारी की अपील की।
उन्होंने आगामी 25 जून को आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय जल संरक्षण कार्यक्रम में नागरिकों से सहभागिता का भी आह्वान किया। कार्यक्रम में आईजी गौरव राजपूत, कलेक्टर गौरव बैनल, पुलिस अधीक्षक सियाज के.एम., जिला पंचायत सीईओ जगदीश गोमे, अपर कलेक्टर पीएस त्रिपाठी तथा मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के संभाग समन्वयक प्रवीण पाठक सहित अन्य अधिकारी और ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. श्रमदान और जल संरक्षण कार्यक्रमों के बाद क्या प्रशासन यह मापता है कि संबंधित तालाबों की जलधारण क्षमता या जल स्तर में वास्तविक सुधार हुआ या नहीं?
2. जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जिले में अब तक कितने पारंपरिक जल स्रोतों का स्थायी पुनर्जीवन हुआ और उसका सार्वजनिक डेटा कब जारी होगा?
3. यदि जल संरक्षण जनभागीदारी का अभियान है, तो क्या गांव स्तर पर इसके लिए स्थायी निगरानी समितियां और वार्षिक लक्ष्य भी तय किए गए हैं?
