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| सीधी; कलेक्टर का अल्टीमेटम—किसी बसाहट में प्यास नहीं, लापरवाही पर जवाबदेही तय होगी Aajtak24 News |
सीधी - गर्मी के बढ़ते प्रभाव और संभावित जल संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने पेयजल व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। जिले की सभी बसाहटों तक शुद्ध और पर्याप्त पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से प्रशासन ने विभागों को समन्वय के साथ काम करने और त्वरित समाधान की व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर विकास मिश्रा ने पेयजल व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले की प्रत्येक बसाहट में शुद्ध एवं पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया जाए और आमजन को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
बैठक में जल स्तर की निरंतर निगरानी और कमजोर पड़ रहे जल स्रोतों के लिए समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया गया। प्रशासन का कहना है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए संबंधित विभागों को सक्रिय रूप से काम करना होगा। जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालित कार्यों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने गुणवत्ता और समयसीमा पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ समय पर आम लोगों तक पहुंचे और इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग की जाए।
बैठक में पेयजल स्रोतों की स्वच्छता को भी प्राथमिकता दी गई। कुओं, हैंडपंपों, पानी की टंकियों और अन्य जल स्रोतों के नियमित शुद्धिकरण के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने इसे केवल सुविधा नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा विषय बताया। सार्वजनिक पेयजल स्रोतों पर अतिक्रमण को गंभीर मानते हुए कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि हैंडपंप और अन्य सार्वजनिक जल स्रोतों के आसपास किए गए अवैध कब्जे हटाए जाएं ताकि नागरिकों को परेशानी न हो।
पेयजल शिकायतों के त्वरित निराकरण और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। प्रशासन ने संकेत दिया कि लापरवाही की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत शैलेन्द्र सिंह सोलंकी तथा डिप्टी कलेक्टर एवं प्रभारी सीएमओ प्रिया पाठक सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. जिन बसाहटों में हर वर्ष गर्मी के दौरान पेयजल संकट सामने आता है, क्या प्रशासन ने उनके लिए स्थायी समाधान की अलग कार्ययोजना बनाई है?
2. जल जीवन मिशन के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं में से कितनी पूरी तरह चालू हैं और कितनी अभी भी आंशिक या कागजों तक सीमित हैं?
3. सार्वजनिक जल स्रोतों पर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं—क्या इसके लिए समयसीमा और जिम्मेदार अधिकारियों की सूची भी तय की गई है?
