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| नरसिंहपुर; जहां सरकारी गाड़ियां कम पहुंचीं, वहां कलेक्टर पहुंचीं पहले! माल्हनवाड़ा में लगा योजनाओं का पूरा दरबार Aajtak24 News |
नरसिंहपुर - सरकारी योजनाओं को गांव की चौपाल तक पहुंचाने और प्रशासन को सीधे जनता से जोड़ने के उद्देश्य से नरसिंहपुर जिले के दूरस्थ क्षेत्र ग्राम माल्हनवाड़ा (इकलोनी) में शुक्रवार को प्रशासन का पूरा अमला उतरा। ‘सबसे दूर सबसे पहले जनभागीदारी अभियान’ के तहत आयोजित जनसुनवाई एवं लाभ संतृप्ति शिविर में कलेक्टर रजनी सिंह ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और कई मामलों में मौके पर ही समाधान कराया। ग्राम पंचायत माल्हनवाड़ा के गोंडवाना भवन में आयोजित इस शिविर की शुरुआत मां सरस्वती के पूजन-अर्चन के साथ हुई। शिविर में प्रशासन ने यह संदेश देने की कोशिश की कि योजनाएं अब कार्यालयों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि पात्र हितग्राहियों तक सीधे पहुंचेंगी।
कलेक्टर ने बच्चों को नि:शुल्क साइकिलें और पाठ्य पुस्तकें वितरित कीं। जिला स्तर के अधिकारी एक ही वाहन से शिविर स्थल पहुंचे, जिसे प्रशासन ने समन्वित कार्यशैली का प्रतीक बताया। शिविर के दौरान आधार पंजीयन और सुधार कार्य किए गए। साथ ही जाति प्रमाण पत्र, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, उज्ज्वला योजना 3.0, मातृ वंदना योजना, पेंशन योजनाएं, मनरेगा जॉब कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड, किसान सम्मान निधि, संबल योजना और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी और लाभ ग्रामीणों तक पहुंचाया गया।
स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया, जहां कुपोषण की जांच की गई और दवाओं का वितरण हुआ। क्षय रोग उन्मूलन अभियान के तहत 70 नागरिकों की स्क्रीनिंग की गई और 40 लोगों के सैंपल लिए गए, जो ग्रामीण स्वास्थ्य स्थिति पर ध्यान केंद्रित करने का संकेत है। शिविर में कई लाभार्थियों को सीधे योजनाओं का लाभ भी मिला। मातृ वंदना योजना के तहत हितग्राहियों के खातों में राशि पहुंचाई गई, बच्चों के नए आधार कार्ड बने, बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए और उज्ज्वला योजना के लिए आवेदन लिए गए। पशुपालन विभाग ने किसान क्रेडिट कार्ड और कुक्कुट वितरण जैसी गतिविधियां भी संचालित कीं।
प्रशासन ने इसे ‘लाभ संतृप्ति मॉडल’ बताया, लेकिन अब असली चुनौती यह होगी कि शिविर में मिले आश्वासन और लंबित आवेदनों का समाधान कितनी समयसीमा में जमीन पर दिखाई देता है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. जिन आवेदनों का मौके पर निराकरण नहीं हुआ, उनकी निगरानी और समयसीमा सार्वजनिक करने की क्या व्यवस्था बनाई गई है?
2. ‘सबसे दूर सबसे पहले’ अभियान के तहत अब तक कितने गांवों में शिविर हुए और उनमें से कितने लाभार्थियों को स्थायी लाभ मिला, इसका डेटा क्या है?
3. शिविर में योजनाओं की जानकारी और पंजीयन तो हुआ, लेकिन कितने मामलों में वास्तविक लाभ राशि या सेवा निर्धारित समय में लाभार्थियों तक पहुंची—क्या इसकी स्वतंत्र समीक्षा होगी?
