![]() |
| गुना; कूड़े पर मीटिंग, जमीन पर सच्चाई? कलेक्टर ने पूछा काम का जज्बा… अब सफाई व्यवस्था देगी जवाब Aajtak24 News |
गुना - गुना जिले में अब स्वच्छता सिर्फ सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसे जमीन पर उतारने की तैयारी प्रशासन ने शुरू कर दी है। कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय समिति और विशेष सेल की बैठक में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कई अहम निर्देश दिए गए। बैठक में स्वच्छता सर्वेक्षण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और नगर निकायों की वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने साफ कहा कि जिस तरह व्यक्ति अपने घर को साफ रखता है, उसी तरह शहर और वार्डों में भी स्वच्छता दिखनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से उपलब्ध संसाधनों में बेहतर परिणाम देने की अपेक्षा जताई और कहा कि काम करने का जज्बा सबसे बड़ा संसाधन होता है।
बैठक में गीले, सूखे, घरेलू और ई-वेस्ट कचरे के पृथक्करण को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि कचरा परिवहन करने वाले सभी वाहन पूरी तरह ढंके हुए हों ताकि रास्तों में गंदगी न फैले। साथ ही खुले में कचरा संग्रहण पाए जाने पर संबंधित वाहन चालकों के खिलाफ जुर्माना और दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। एक अलग पहल के तहत कचरा कलेक्शन पॉइंट को ‘सेल्फी पॉइंट’ के रूप में विकसित करने का सुझाव भी सामने आया, ताकि स्वच्छता के प्रति लोगों में सकारात्मक भागीदारी बढ़े।
स्वच्छता कार्य में लगे कर्मचारियों को लेकर भी प्रशासन ने संवेदनशील रुख दिखाया। स्वच्छता दूतों के लिए हेल्थ कैंप आयोजित करने, मास्क, ग्लव्स, शूज, पानी की बोतल और सुरक्षा किट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। बैठक में अमानक पॉलिथीन के खिलाफ नियमित छापेमारी, जरूरत के अनुसार अतिरिक्त कचरा वाहनों की मांग और रिसाइक्लिंग व्यवस्था मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। बल्क वेस्ट जनरेटर (BWG) के लिए तय मानकों के पालन, EPR पंजीयन और रिसाइक्लिंग पिकअप पॉइंट विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
प्रशासन का दावा है कि अब नियमों के क्रियान्वयन, निगरानी और प्रवर्तन की कार्रवाई जमीनी स्तर पर दिखाई देगी। हालांकि असली परीक्षा आने वाले दिनों में होगी कि निर्देशों का असर बैठकों से बाहर निकलकर शहर की गलियों तक पहुंचता है या नहीं।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. जिले में पिछले एक वर्ष में स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर कितना बजट खर्च हुआ, और उसके मुकाबले जमीन पर कौन से मापनीय परिणाम हासिल हुए?
2. यदि खुले में कचरा मिलने पर वाहन चालकों पर कार्रवाई होगी, तो नगर निकाय अधिकारियों और निगरानी तंत्र की जवाबदेही तय करने का स्पष्ट मॉडल क्या है?
3. कचरा कलेक्शन पॉइंट को ‘सेल्फी पॉइंट’ बनाने से पहले क्या जिले के सभी वार्डों में वैज्ञानिक कचरा पृथक्करण और रिसाइक्लिंग व्यवस्था पूरी तरह लागू हो चुकी है?
