| फाइलों से निकलकर मैदान में उतरा प्रशासन: जंगलों के बीच जन चौपाल, कलेक्टर ने युवाओं संग खेला क्रिकेट Aajtak24 News |
बीजापुर - जंगल, पहाड़ और लंबी दूरी… जहां कभी प्रशासन की मौजूदगी अपवाद मानी जाती थी, वहां अब प्रशासन गांवों तक पहुंचकर सीधे संवाद करने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है। बीजापुर जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसा ही दृश्य तब देखने को मिला जब प्रशासनिक अमला गांवों तक पहुंचा और लोगों की समस्याएं मौके पर सुनी गईं।
कलेक्टर श्री विश्वदीप, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव और जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नम्रता चौबे ने ग्राम पंचायत सागमेटा, सण्ड्रा, एडापल्ली और पीलूर का दौरा कर जन चौपाल आयोजित की। इस दौरान ग्रामीणों ने सड़क, राशन वितरण, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और आवागमन जैसी मूलभूत समस्याएं खुलकर अधिकारियों के सामने रखीं।
अधिकारियों ने संबंधित विभागों को कई मामलों में तत्काल कार्रवाई और समयबद्ध समाधान के निर्देश दिए। प्रशासन ने दोहराया कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्राथमिकता है और दूरस्थ इलाकों के लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भटकना नहीं पड़ना चाहिए।
‘बस्तर मुन्ने’ अभियान पर जोर
दौरे के दौरान कलेक्टर ने विशेष रूप से ‘बस्तर मुन्ने’ कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को पात्र लोगों तक दस्तावेज और योजनाओं का लाभ सरल तरीके से पहुंचाने के निर्देश दिए। लक्ष्य यह रखा गया कि पात्रता और सुविधा के बीच दूरी कम हो।
जनगणना और विकास का संबंध समझाया
अधिकारियों ने ग्रामीणों से जनगणना कार्य में सहयोग की अपील करते हुए बताया कि सही आंकड़े भविष्य की योजनाओं और संसाधनों के वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पुलिस अधीक्षक ने ग्रामीणों से संवाद कर सुरक्षा, सहभागिता और विश्वास बढ़ाने की बात कही, जबकि जिला पंचायत सीईओ ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा पर जोर दिया।
जब कलेक्टर उतरे क्रिकेट मैदान में…
इस पूरे दौरे का सबसे अलग और चर्चित दृश्य ग्राम सण्ड्रा में देखने को मिला। यहां कलेक्टर ग्रामीण युवाओं के साथ क्रिकेट मैदान में उतरे और कुछ समय खेल में बिताया। प्रशासन के अनुसार इसका उद्देश्य युवाओं से संवाद बढ़ाना और उन्हें शिक्षा, खेल और सकारात्मक सामाजिक भागीदारी के लिए प्रेरित करना था। ग्रामीणों ने कहा कि जब अधिकारी सीधे गांव पहुंचते हैं और समस्याएं सुनते हैं, तो समाधान की उम्मीद और प्रशासन पर भरोसा दोनों मजबूत होते हैं। लेकिन अब असली चुनौती इन घोषणाओं और निर्देशों को जमीन पर समयबद्ध तरीके से लागू करने की होगी।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. जन चौपाल में उठाई गई समस्याओं के समाधान के लिए क्या कोई सार्वजनिक समयसीमा और निगरानी तंत्र तय किया गया है?
2. जिन गांवों में सड़क, स्वास्थ्य और राशन जैसी बुनियादी समस्याएं सामने आईं, वहां अब तक योजनाओं का वास्तविक क्रियान्वयन क्यों नहीं हो पाया?
3. प्रशासनिक दौरों के बाद घोषित फैसलों और वास्तविक काम की प्रगति को जनता तक पहुंचाने के लिए क्या कोई सार्वजनिक रिपोर्ट जारी की जाएगी?