| दंतेवाड़ा; ‘दो साल तक गुमशुदगी, फिर बोरी में मिला कंकाल: रिश्तों, शक और साजिश ने खोला अंधे कत्ल’ का राज Aajtak24 News |
दंतेवाड़ा - दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में पुलिस ने एक पुराने गुमशुदगी मामले की जांच के दौरान हत्या की ऐसी गुत्थी सुलझाने का दावा किया है, जिसमें रिश्तों में पैदा हुए तनाव, कथित साजिश और लंबे समय तक छिपे सच ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया। पुलिस के अनुसार जिस महिला की तलाश लंबे समय से की जा रही थी, उसका कंकाल गांव में दफन हालत में बरामद किया गया। पुलिस के मुताबिक मामला गुमशुदा महिला रामदई कश्यप से जुड़ा है, जिसकी पतासाजी के लिए पहले भी प्रयास किए गए थे, लेकिन कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिला था। बाद में मामले की नए सिरे से जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान पुलिस टीम ने परिजनों के बयान लिए और कॉल डिटेल का विश्लेषण किया। पुलिस के अनुसार जांच में कुछ संपर्कों और रिश्तों से जुड़े पहलू सामने आए, जिसके बाद पूछताछ का दायरा बढ़ाया गया। आगे की जांच और पूछताछ के आधार पर पुलिस का दावा है कि कथित तौर पर व्यक्तिगत संबंधों को लेकर विवाद और नाराजगी की पृष्ठभूमि में हत्या की साजिश बनाई गई। पुलिस के अनुसार आरोप है कि महिला की हत्या कर शव को वाहन के जरिए गांव ले जाकर छिपाने का प्रयास किया गया।
इसके बाद दंडाधिकारी, फोरेंसिक विशेषज्ञों और पुलिस टीम की मौजूदगी में संदिग्ध स्थान पर उत्खनन कराया गया। वहां से प्लास्टिक बोरी में मानव कंकाल बरामद किया गया, जिसे आगे की प्रक्रिया के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने बताया कि मामले में संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया गया।
पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई पुराने मामलों और गुमशुदा व्यक्तियों की जांच के लिए चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा थी। मामले में आगे की विवेचना जारी है। इस मामले में पुलिस ने आरोप और जांच के आधार पर कार्रवाई की है। अदालत में सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना अभी शेष है, इसलिए आरोपों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाता।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. यदि घटना लगभग दो वर्ष पुरानी बताई जा रही है, तो गुमशुदगी दर्ज होने और हत्या के एंगल तक पहुंचने में इतना लंबा समय क्यों लगा? शुरुआती जांच में क्या चूक हुई?
2. पुलिस ने कॉल डिटेल और पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ाई—लेकिन क्या इस मामले में कोई वैज्ञानिक या फोरेंसिक साक्ष्य भी उपलब्ध हैं जो कथित घटनाक्रम की पुष्टि करते हों?
3. जिस क्षेत्र में शव दफन होने का दावा है, वहां इतने लंबे समय तक किसी को जानकारी क्यों नहीं मिली और क्या स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र या निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी?