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| रीवा में चुनावी तैयारी का पहला बड़ा चरण, मतदाता सूची की शुद्धता पर प्रशासन का फोकस Aajtak24 News |
रीवा - जिले में आगामी नगरीय निकाय और पंचायतराज संस्थाओं के चुनावों को देखते हुए फोटोयुक्त मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य तेज कर दिया गया है। इसी क्रम में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त प्रेक्षक अरूण पाण्डेय ने कलेक्ट्रेट सभागार में समीक्षा बैठक लेकर तैयारियों का जायजा लिया। बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी चुनाव की विश्वसनीयता की शुरुआत मतदाता सूची से होती है और पुनरीक्षण कार्य पूरी पारदर्शिता तथा गंभीरता से किया जाना चाहिए।
हर पात्र मतदाता का नाम जोड़ने पर जोर
प्रेक्षक ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोई भी पात्र व्यक्ति मतदाता सूची से बाहर न रहे। आयोग के निर्देशों के अनुसार एसआईआर के बाद तैयार मतदाता सूची को आधार बनाया जाए और यदि कोई पात्र व्यक्ति किसी कारणवश सूची में शामिल नहीं हो पाया है तो आवेदन के माध्यम से उसका नाम जोड़ा जाए। उन्होंने पुनरीक्षण अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर भी बल दिया ताकि अधिक से अधिक पात्र नागरिक इसका लाभ उठा सकें।
अगले वर्ष के चुनावों की नींव बनेगी यही सूची
बैठक में कहा गया कि अगले वर्ष होने वाले नगरीय निकाय और पंचायतराज संस्थाओं के चुनावों के लिए यही संशोधित मतदाता सूची आधार बनेगी। सभी एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देश दिए गए कि प्रारूप प्रकाशन के बाद प्राप्त नाम जोड़ने और हटाने संबंधी सभी आवेदनों का ऑनलाइन पंजीयन और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करें।
हजारों नाम एक से अधिक स्थानों पर मिले
बैठक में कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने जानकारी दी कि पुनरीक्षण के दौरान नगरीय निकाय क्षेत्रों में 1688 और ग्रामीण क्षेत्रों में 5054 मतदाताओं के नाम एक से अधिक स्थानों पर पाए गए हैं।इन मामलों में आवश्यक प्रक्रिया अपनाकर एक स्थान से नाम पृथक करने की कार्रवाई की जा रही है।
18 जून को प्रकाशित होगी अंतिम सूची
बैठक में बताया गया कि मतदाता सूची के संबंध में दावे और आपत्तियां 25 मई तक स्वीकार की जाएंगी। इसके बाद निराकरण कर 18 जून को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। प्रेक्षक 26 मई तक शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर पुनरीक्षण कार्य की जमीनी समीक्षा भी करेंगे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. यदि हजारों मतदाताओं के नाम एक से अधिक स्थानों पर मिले हैं, तो क्या इससे पिछली चुनावी सूचियों की गुणवत्ता और सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठते?
2. मतदाता सूची से छूटे पात्र नागरिकों की पहचान के लिए प्रशासन ने स्वयं कोई सक्रिय सर्वे कराया है या पूरी प्रक्रिया केवल आवेदन आधारित है?
3. दावे-आपत्तियों के निराकरण के बाद क्या अंतिम मतदाता सूची का स्वतंत्र ऑडिट या सार्वजनिक सत्यापन तंत्र भी लागू किया जाएगा?
