बिलासपुर; 513 आवेदन, मंच पर भरोसे के दावे… अब मिट्ठूनवागांव पूछ रहा है—समाधान कब तक?

बिलासपुर; 513 आवेदन, मंच पर भरोसे के दावे… अब मिट्ठूनवागांव पूछ रहा है—समाधान कब तक?

बिलासपुर - कोटा विकासखंड के मिट्ठूनवागांव में आयोजित जिला स्तरीय समाधान शिविर ने एक बार फिर प्रशासन के उस मॉडल को सामने रखा, जिसमें सरकार और जनता के बीच सीधे संवाद का दावा किया जा रहा है। सुशासन तिहार के तहत आयोजित इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे, योजनाओं की जानकारी ली और अपनी समस्याओं से जुड़े आवेदन जमा किए। शिविर में कुल 513 आवेदन प्राप्त हुए, जिनके निराकरण के लिए समय-सीमा तय किए जाने की बात कही गई।

कार्यक्रम में विधायक अटल श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, जिले के प्रभारी सचिव एवं अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर संजय अग्रवाल सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। मंच से योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और समस्याओं के त्वरित समाधान का संदेश दिया गया।

विधायक अटल श्रीवास्तव ने ग्रामीणों से अधिक से अधिक संख्या में शिविरों में पहुंचकर योजनाओं का लाभ लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन तभी सफल होंगे जब पात्र व्यक्ति तक लाभ वास्तविक रूप से पहुंचे। जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी ने कहा कि सुशासन तिहार केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि जनता के भरोसे का मंच बनने की दिशा में काम कर रहा है। उनका कहना था कि गांव, गरीब, किसान और जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंचाना शासन की प्राथमिकता है।

प्रभारी सचिव मनोज पिंगुआ ने समाधान शिविरों को प्रशासन और जनता के बीच दूरी कम करने का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि विभागीय समन्वय के जरिए मौके पर समाधान देने की कोशिश हो रही है ताकि लोगों का विश्वास मजबूत हो। वहीं प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में इस अभियान को ग्रामीण समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रयास बताया।

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने शिविर को केवल योजनाओं तक सीमित न रखते हुए जल संरक्षण और वृक्षारोपण का संदेश भी दिया। शिविर में कई योजनाओं के तहत लाभ वितरण किया गया। पांच लोगों को राशन कार्ड, 13 को श्रम कार्ड, आठ को मनरेगा जॉब कार्ड, चार को आयुष्मान कार्ड, 15 लोगों को लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस दिया गया। दो महिला हितग्राहियों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन, 11 को कृषक ऋण पुस्तिका और चार किसानों को कृषि उपकरण उपलब्ध कराए गए। इसके साथ ही सम्मान निधि और महतारी वंदन योजना से जुड़े केवाईसी कार्य भी किए गए।

स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत 75 लोगों की बीपी और शुगर जांच, 22 लोगों की सिकल सेल जांच और 118 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। हालांकि इस शिविर की असली सफलता अब इस बात से तय होगी कि 513 आवेदनों में कितने मामलों का तय समय में निराकरण होता है और कितने लोग वास्तव में लाभ प्राप्त कर पाते हैं।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. शिविर में मिले 513 आवेदनों में से कितने आवेदन मौके पर निपटाए गए और कितनों को बाद की कार्रवाई के लिए लंबित रखा गया? इसकी सार्वजनिक निगरानी कैसे होगी?

2. यदि किसी विभाग द्वारा तय समय-सीमा में आवेदन का निराकरण नहीं किया जाता, तो क्या संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय करने का कोई लिखित तंत्र मौजूद है?

3. शिविर में वितरित लाभ और किए गए केवाईसी के बाद क्या प्रशासन लाभार्थियों का फॉलो-अप ऑडिट करेगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लाभ केवल कागजों तक सीमित न रह जाए?

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