![]() |
| सीहोर ; 450 केस, 2 करोड़ से ज्यादा वसूली… फिर भी नहीं थम रहा अवैध खनन! Aajtak24 News |
सीहोर - जिले में लगातार कार्रवाई और करोड़ों रुपये के अर्थदंड के बावजूद अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन पूरी तरह नहीं रुक पा रहा है। इसी चुनौती के बीच कलेक्टर बालागुरू के. की अध्यक्षता में जिला खनिज टास्क फोर्स समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें अवैध खनन के खिलाफ अब तक हुई कार्रवाई और आगे की रणनीति पर विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राजस्व, पुलिस, वन, परिवहन और खनिज विभाग मिलकर संयुक्त कार्रवाई जारी रखें। संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निरीक्षण, रात्रिकालीन गश्त और चेकिंग अभियान चलाने पर जोर दिया गया। साथ ही अवैध परिवहन में शामिल वाहनों और मशीनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
समीक्षा में सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक जिले में अवैध परिवहन के 450, अवैध उत्खनन के 89 और अवैध भंडारण के 12 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में कुल 2 करोड़ 14 लाख 58 हजार 48 रुपये का अर्थदंड लगाया गया, जबकि लगभग 2 करोड़ 14 लाख 36 हजार 796 रुपये की वसूली भी की गई। कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने बड़े पैमाने पर मशीनरी और वाहनों को जब्त किया। इनमें 329 ट्रैक्टर-ट्रॉली, 66 डंपर, 12 पोकलेन, 38 जेसीबी, 13 लोडर और 19 नावें शामिल हैं। आंकड़े बताते हैं कि जिले में अवैध खनन नेटवर्क पर कार्रवाई लगातार जारी है, लेकिन गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी हैं।
वहीं नए वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी कार्रवाई का सिलसिला जारी है। 1 अप्रैल 2026 से 20 मई 2026 तक अवैध परिवहन के 25 और अवैध उत्खनन के 5 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में 12 लाख 67 हजार 186 रुपये का अर्थदंड लगाया और वसूल किया गया। इस दौरान 21 ट्रैक्टर-ट्रॉली, 4 डंपर, 3 जेसीबी और 2 लोडर जब्त किए गए।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जब्त वाहनों के मामलों का जल्द निपटारा किया जाए, लंबित प्रकरणों में तेजी लाई जाए और अर्थदंड वसूली की प्रक्रिया मजबूत बनाई जाए। साथ ही खदान क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने और बिना अनुमति खनिज परिवहन करने वालों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अवैध खनिज गतिविधियों की सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर कार्रवाई हो और संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी रखी जाए।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. जब पिछले वित्तीय वर्ष में 450 अवैध परिवहन और 89 अवैध उत्खनन के मामले सामने आए, तो क्या यह नहीं दिखाता कि मौजूदा निगरानी व्यवस्था समय पर अवैध खनन रोकने में विफल रही?
2. करोड़ों रुपये का अर्थदंड लगाया गया, लेकिन अब तक कितने मामलों में केवल जुर्माना लेकर वाहन छोड़े गए और कितनों पर आपराधिक कार्रवाई की गई?
3. जिन क्षेत्रों को संवेदनशील माना गया है, क्या वहां अवैध खनन रोकने के लिए तकनीकी निगरानी (ड्रोन, GPS, डिजिटल ट्रैकिंग) लागू करने की कोई समयबद्ध योजना है या कार्रवाई अभी भी केवल छापों तक सीमित है?
