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| राजगढ़; लोन मंजूर, फिर भी पैसा नहीं?” कलेक्टर की दो टूक— 15 दिन में दिखे नतीजे Aajtak24 News |
राजगढ़ - शासन की स्वरोजगार और वित्तीय योजनाओं का लाभ समय पर पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे, इसे लेकर जिला प्रशासन ने बैंकिंग व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाया है। गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय बैंकर्स एवं हितग्राहियों की संयुक्त बैठक में कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने ऋण प्रकरणों में अनावश्यक देरी पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि स्वीकृत ऋणों का तत्काल वितरण सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक (एलडीएम), विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधक, विभागीय अधिकारी और हितग्राही उपस्थित रहे। कलेक्टर ने कहा कि हितग्राहियों को ऋण प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और कोलेटरल सिक्योरिटी की जानकारी एक ही बार में स्पष्ट रूप से दी जाए ताकि उन्हें बार-बार बैंक के चक्कर न लगाने पड़ें।
बैठक के दौरान कलेक्टर ने स्वयं हितग्राहियों से संवाद कर लंबित मामलों और उनकी समस्याओं की जानकारी ली। इसके बाद संबंधित बैंक प्रबंधकों को निर्देश दिए गए कि लंबित ऋण प्रकरणों का त्वरित निराकरण किया जाए और बिना कारण देरी की प्रवृत्ति खत्म की जाए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मामलों में ऋण स्वीकृत हो चुका है, वहां केवल स्वीकृति नहीं बल्कि वास्तविक डिस्बर्समेंट यानी राशि का भुगतान प्राथमिकता पर सुनिश्चित किया जाए। साथ ही सभी एसडीएम को निर्देश दिए गए कि वे लंबित मामलों का डेटा संकलित करें और ऋण स्वीकृति में आ रही राजस्व संबंधी बाधाओं को तेजी से दूर करें।
कलेक्टर ने चेतावनी दी कि 15 दिन बाद सभी लंबित और स्वीकृत मामलों की दोबारा समीक्षा होगी और हर प्रकरण की अलग-अलग मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंचे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. यदि ऋण स्वीकृत होने के बाद भी राशि जारी नहीं हो रही थी, तो अब तक ऐसे मामलों में संबंधित बैंक शाखाओं की जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई?
2. 15 दिन बाद समीक्षा की बात कही गई है— क्या प्रशासन बैंकवार लंबित, स्वीकृत और डिस्बर्स किए गए मामलों का सार्वजनिक डेटा जारी करेगा?
3. स्वरोजगार योजनाओं में देरी का सीधा असर आय और रोजगार पर पड़ता है— क्या ऐसे हितग्राहियों के नुकसान का कोई आकलन या जवाबदेही तंत्र मौजूद है?*
