इन्दौर; 22 कुपोषित बच्चे, औचक निरीक्षण और सख्त चेतावनी… क्या पोषण पुनर्वास केंद्रों की हकीकत अब बदलेगी? Aajtak24 News

इन्दौर; 22 कुपोषित बच्चे, औचक निरीक्षण और सख्त चेतावनी… क्या पोषण पुनर्वास केंद्रों की हकीकत अब बदलेगी? Aajtak24 News

इन्दौर - जिले में कुपोषण नियंत्रण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से महू और मानपुर स्थित पोषण पुनर्वास केंद्रों (एनआरसी) का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने भर्ती बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और उपचार व्यवस्था का जायजा लिया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हासानी तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा ने केंद्रों की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए कहा कि गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की समय पर पहचान, बेहतर प्रबंधन और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

निरीक्षण के दौरान दोनों केंद्रों में कुल 22 कुपोषित बच्चे भर्ती पाए गए। इनमें 15 बच्चे मानपुर एनआरसी और 7 बच्चे महू एनआरसी में उपचार और पोषण पुनर्वास के लिए भर्ती थे। अधिकारियों ने बच्चों के स्वास्थ्य सुधार, पोषण प्रबंधन और पुनर्वास प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए टीम को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान महू एनआरसी में भर्ती एक शिशु की माता के लिए भी विशेष भोजन और अतिरिक्त पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बच्चों के साथ माताओं के स्वास्थ्य और पोषण पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना आवश्यक है।

सिविल अस्पताल महू परिसर की साफ-सफाई व्यवस्था पर भी अधिकारियों ने नाराजगी जताई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने तत्काल सुधार के निर्देश देते हुए कहा कि नियमित सफाई, डिसइन्फेक्शन और शौचालयों की स्वच्छता सुनिश्चित की जाए तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से मैदानी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए कि बच्चों के पोषण आहार की गुणवत्ता बनाए रखें और माताओं को पोषण संबंधी जागरूकता लगातार दी जाए। साथ ही यह भी संकेत दिया गया कि भविष्य में दोनों विभागों के संयुक्त निरीक्षण लगातार जारी रहेंगे ताकि सेवाओं की गुणवत्ता पर निगरानी बनी रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. जब पोषण पुनर्वास केंद्रों में अभी भी कुपोषित बच्चे भर्ती मिल रहे हैं, तो क्या यह माना जाए कि समुदाय स्तर पर कुपोषण की पहचान और रोकथाम प्रणाली पर्याप्त प्रभावी नहीं है?

2. निरीक्षण में साफ-सफाई सुधारने के निर्देश दिए गए, लेकिन क्या इससे पहले भी ऐसी कमियां मिली थीं और उन पर जिम्मेदारी तय की गई थी या नहीं?

3. पोषण पुनर्वास केंद्रों से डिस्चार्ज होने के बाद बच्चों की वास्तविक स्थिति पर कितने समय तक निगरानी रखी जाती है और कितने बच्चों में दोबारा कुपोषण के मामले सामने आते हैं?

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