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| झाबुआ; तालाब, नदियां और एसटीपी पर बड़ी समीक्षा… बारिश से पहले प्रशासन ने क्यों बढ़ाई रफ्तार? Aajtak24 News |
झाबुआ - जिले के नगरीय क्षेत्रों में जल प्रबंधन और विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समीक्षा एवं निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में नगरीय निकायों में चल रहे विकास कार्यों, जल प्रदाय व्यवस्था और जल स्रोतों के पुनर्जीवन कार्यों की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया।
बैठक का केंद्र बिंदु अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत जल स्रोतों के पुनर्जीवन से जुड़े कार्य रहे। अधिकारियों ने झाबुआ के बहादुर सागर तालाब, पेटलावद की पम्पावती नदी, थांदला की पद्मावती नदी, राणापुर के राणासागर तालाब और मेघनगर के छोटा तालाब में चल रहे कार्यों की अद्यतन जानकारी प्रस्तुत की। इन परियोजनाओं को केवल सौंदर्यीकरण नहीं बल्कि भविष्य की जल उपलब्धता और शहरी जल प्रबंधन से जोड़कर देखा जा रहा है।
बैठक में इन क्षेत्रों में प्रस्तावित और निर्माणाधीन एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा की गई। जनप्रतिनिधियों से सुझाव लिए गए और निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि वर्षा ऋतु शुरू होने से पहले महत्वपूर्ण कार्य पूरे किए जाना प्राथमिकता होगी।
इसके अलावा जिले के नगरीय निकायों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। गर्मी और आगामी मानसून को देखते हुए जल वितरण प्रणाली को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए ताकि नागरिकों को किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।
बैठक में फायर वाहनों की उपलब्धता और आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। प्रशासन ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि आवश्यकता के अनुरूप संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके।
कलेक्टर डॉ. भरसट ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य तय समय-सीमा के भीतर और गुणवत्ता मानकों के अनुसार पूरे किए जाएं। उन्होंने विशेष रूप से एसटीपी निर्माण कार्यों को बारिश से पहले पूर्ण करने पर जोर दिया। बैठक में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी भाग लिया तथा विभिन्न विकास कार्यों की स्थिति पर सुझाव और समीक्षा प्रस्तुत की।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. अमृत 2.0 के तहत जल स्रोतों के पुनर्जीवन पर काम हो रहा है, लेकिन क्या इन परियोजनाओं के लिए तय समय-सीमा और वास्तविक प्रगति प्रतिशत सार्वजनिक रूप से जारी किए जाएंगे?
2. जिन जल स्रोतों के लिए एसटीपी बनाए जा रहे हैं, क्या उनके चालू होने के बाद जल गुणवत्ता सुधार और प्रदूषण नियंत्रण का कोई मापनीय लक्ष्य तय किया गया है?
3. हर वर्ष बारिश से पहले कार्य पूरे करने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन पिछले वर्षों में समय पर पूर्ण न होने वाली परियोजनाओं पर कितने अधिकारियों या एजेंसियों की जवाबदेही तय की गई?
