| 2 किलोमीटर इंद्रावती पार कर पहुंची स्वास्थ्य टीम… जहां कभी इलाज नहीं Aajtak24 News |
बीजापुर - दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और लंबे समय तक सीमित पहुंच वाले क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में बीजापुर जिले में एक विशेष स्वास्थ्य अभियान संचालित किया गया। विकासखंड भैरमगढ़ के अंदरुनी क्षेत्र नूगुर और उसके आश्रित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यूनिवर्सल हेल्थ स्क्रीनिंग शिविर आयोजित कर सैकड़ों ग्रामीणों की जांच की। कलेक्टर विश्वदीप के मार्गदर्शन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के नेतृत्व में संचालित इस अभियान के तहत स्वास्थ्य टीम कठिन रास्तों और प्राकृतिक बाधाओं को पार कर गांवों तक पहुंची। उप स्वास्थ्य केंद्र नूगुर विकासखंड मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर दूर स्थित है और यहां पहुंचने के लिए टीम को लगभग 2 किलोमीटर चौड़ी इंद्रावती नदी पार करनी पड़ी।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार लंबे समय तक यह क्षेत्र सुरक्षा और भौगोलिक चुनौतियों के कारण नियमित सेवाओं से दूर रहा। अब स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों के तहत ग्राम नूगुर, हिंगमेटा और हुर्रागवाली में शिविर लगाए गए। यहां स्वास्थ्य जांच के साथ टीकाकरण, स्वास्थ्य शिक्षा और विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी भी दी गई। शिविर में कुल 642 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें नूगुर में 207, हिंगमेटा में 125 और हुर्रागवाली में 310 लोगों की जांच की गई। स्क्रीनिंग के दौरान गैर-संचारी रोग (एनसीडी), बुखार, त्वचा संबंधी समस्याओं और अन्य सामान्य स्वास्थ्य स्थितियों की पहचान की गई। जरूरतमंदों को दवाइयां दी गईं और गंभीर मरीजों को आगे उपचार के लिए सलाह दी गई।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि पहले कई ग्रामीण स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण को लेकर संकोच करते थे, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ने के साथ लोग स्वयं जांच और टीकाकरण के लिए आगे आ रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि अंदरूनी क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य पहुंच केवल उपचार नहीं बल्कि विश्वास निर्माण और स्वास्थ्य जागरूकता का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. यदि स्वास्थ्य टीम को नूगुर पहुंचने के लिए इंद्रावती नदी पार करनी पड़ती है, तो ऐसे क्षेत्रों में स्थायी स्वास्थ्य सुविधा, आपातकालीन रेफरल और एम्बुलेंस व्यवस्था कब तक सुनिश्चित होगी?
2. 642 लोगों की जांच हुई— इनमें से कितने मरीजों को आगे उपचार या रेफरल की जरूरत पड़ी और क्या उनके फॉलो-अप की कोई व्यवस्था बनाई गई है?
3. जिन क्षेत्रों में पहले नियमित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंचती थीं, वहां अब कितनी बार स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे और क्या इसके लिए कोई स्थायी कैलेंडर या निगरानी तंत्र बनाया गया है?