रीवा नगर निगम बना अखाड़ा: महापौर के खिलाफ अपनी ही पार्टी के पार्षदों ने खोला मोर्चा Aajtak24 News

रीवा नगर निगम बना अखाड़ा: महापौर के खिलाफ अपनी ही पार्टी के पार्षदों ने खोला मोर्चा Aajtak24 News

रीवा - विन्ध्य की राजनीति का केंद्र कहे जाने वाले रीवा नगर निगम में इन दिनों 'सत्ता बनाम पार्षद' की जंग छिड़ गई है। नगर निगम परिषद में पार्षदों का अपने ही नेतृत्व के प्रति असंतोष अब खुलकर सड़कों और गलियारों में आ गया है। जहाँ कुछ समय पहले भाजपा पार्षदों ने अध्यक्ष के खिलाफ बगावत की थी, वहीं अब कांग्रेस शासित नगर निगम में महापौर अजय मिश्रा 'बाबा' के खिलाफ उनकी अपनी ही पार्टी के पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया है।

महापौर की कार्यप्रणाली से खफा 9 पार्षद नदारद

मंगलवार को आयोजित बजट सत्र की महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस के भीतर की अंतर्कलह साफ दिखाई दी। नगर निगम में कांग्रेस के कुल 16 पार्षद हैं, जिनमें से 9 पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार (बायकाट) कर दिया। केवल 7 पार्षद ही सदन में उपस्थित हुए। नाराज पार्षदों का आरोप है कि महापौर उनकी बातों को अनसुना करते हैं और वार्ड के विकास कार्यों में उनकी कोई भागीदारी सुनिश्चित नहीं की जा रही है। पार्षदों का कहना है कि परिषद में अपनी आवाज उठाने पर उन्हें दबाव बनाकर चुप करा दिया जाता है।

"पार्षदों के पास कोई अधिकार नहीं": महापौर के बयान पर बवाल

वरिष्ठ पार्षद अर्चना मिश्रा ने परिषद की वर्तमान स्थिति पर तीखा प्रहार करते हुए इसे एक 'रंगमंच' करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि महापौर और अध्यक्ष अपनी मर्जी से बैठकें बुलाते हैं और केवल उन्हीं मुद्दों पर चर्चा होती है जो उनके हित में हों। अर्चना मिश्रा ने महापौर के उस पुराने बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कथित तौर पर राजपत्र लहराते हुए कहा था कि "पार्षदों के पास कोई अधिकार नहीं है।" अर्चना मिश्रा का तर्क है कि यदि पार्षदों के पास अधिकार ही नहीं हैं, तो परिषद की बैठकों का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

निर्दलीय पार्षद का अपमान और निलंबन

परिषद की बैठक उस समय और अधिक विवादास्पद हो गई जब वार्ड क्रमांक 13 की निर्दलीय पार्षद नम्रता संजय सिंह को विरोध करने पर अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय ने निलंबित कर सदन से बाहर कर दिया। नम्रता सिंह ने महापौर और अध्यक्ष दोनों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:

"परिषद में जनता की आवाज दबाई जा रही है। हमें केवल दर्शक बनाकर रखना चाहते हैं। एक महिला पार्षद होने के नाते मुझे बार-बार अपमानित किया जाता है और विरोध करने पर हर बार निलंबित कर दिया जाता है। यह रीवा के लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।"

अध्यक्ष के खिलाफ भी बन चुके हैं ऐसे ही हालात

गौरतलब है कि यह रीवा नगर निगम का पहला विद्रोह नहीं है। कुछ महीने पहले भाजपा से अध्यक्ष बने व्यंकटेश पाण्डेय के खिलाफ उनकी ही पार्टी के पार्षद लामबंद हो गए थे। उस समय स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि डिप्टी सीएम के हस्तक्षेप और कांग्रेस पार्षदों के अप्रत्यक्ष समर्थन के बाद ही अध्यक्ष की कुर्सी बच पाई थी। अब ठीक वैसी ही स्थिति महापौर अजय मिश्रा बाबा के सामने खड़ी हो गई है, जहाँ अपनों ने ही बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। रीवा नगर निगम में चल रही यह खींचतान शहर के विकास कार्यों को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। यदि महापौर और पार्षदों के बीच का यह गतिरोध जल्द नहीं सुलझा, तो आने वाले समय में प्रशासनिक कार्य पूरी तरह ठप हो सकते हैं।




Post a Comment

Previous Post Next Post