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| राम मंदिर चंदा चोरी विवाद में सबसे बड़ी कार्रवाई; महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा की छुट्टी, इस्तीफे मंजूर! |
अयोध्या - अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आज एक बहुत बड़ा उलटफेर हो गया है। चौतरफा दबाव और देशव्यापी विवाद के बीच सोमवार को हुई श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की हाई-प्रोफाइल बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया गया है। इस फैसले के साथ ही राम मंदिर ट्रस्ट में चंपत राय के युग का अंत हो गया है।
बैठक से बाहर ही रोक दिए गए चंपत और अनिल मिश्रा
राम मंदिर परिसर में हुई इस आपात बैठक में आज भारी ड्रामा देखने को मिला। चंपत राय और अनिल मिश्रा इस महत्वपूर्ण बैठक का हिस्सा बनने पहुंचे थे, लेकिन नाराज सदस्यों ने दोनों को बैठक कक्ष में प्रवेश नहीं करने दिया और बाहर ही रोक दिया। इतना ही नहीं, गोपाल राव नाम के एक अन्य व्यक्ति ने भी मीटिंग में शामिल होने की कोशिश की, जिन्हें सदस्यों ने अंदर घुसने से मना कर दिया।
बैठक की शुरुआत में ही एजेंडा स्पष्ट कर दिया गया था। सदस्य दीनेन्द्र दास जब अपना कोई विषय उठाने लगे, तो उन्हें साफ कहा गया कि पहले चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर अंतिम फैसला होगा, उसके बाद ही किसी अन्य विषय पर चर्चा की जाएगी।
"देशभर में हुई बदनामी, जिम्मेदारी लेनी होगी"
बैठक के भीतर मौजूद सदस्यों में चंदा चोरी के आरोपों को लेकर भारी आक्रोश देखा गया। ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्यों ने दो टूक कहा कि इस मामले के कारण पूरी दुनिया में राम मंदिर और सनातन धर्म की बदनामी हो रही है, इसलिए इन दोनों शीर्ष पदाधिकारियों को नैतिक जिम्मेदारी लेनी ही होगी। यह बात भी उठाई गई कि पिछले कुछ समय में ट्रस्ट के भीतर जितनी भी नई नियुक्तियां की गई थीं, वे सभी चंपत राय और अनिल मिश्रा की मर्जी से हुई थीं, जिससे गड़बड़ी की आशंका और बढ़ जाती है।
बैठक में शामिल स्वामी परमानंद गिरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, "धर्म की रक्षा करना हमारा पहला कर्तव्य है। जब करोड़ों लोगों की आस्था मंदिर से जुड़ी हो, तो छोटी से छोटी बात का भी ख्याल रखना चाहिए। चढ़ावा चोरी के आरोपों से पूरा देश आहत है।"
SIT जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजरें
गौरतलब है कि चढ़ावा चोरी की बात सामने आने और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन होने के तुरंत बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपना इस्तीफा सौंप दिया था, जिसे आज ट्रस्ट ने आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। एसआईटी इस महाघोटाले की जांच में जुटी हुई है और इन दोनों पूर्व पदाधिकारियों से पहले ही दौर की पूछताछ कर चुकी है। अब ट्रस्ट से छुट्टी होने के बाद इन दोनों पर गिरफ्तारी या अन्य बड़ी कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
