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| सड़कों पर नमाज' और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर भड़के कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी |
नई दिल्ली - कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने सड़कों पर नमाज, बढ़ती महंगाई और घुसपैठ जैसे ज्वलंत मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर चौतरफा और तीखा हमला बोला है। उन्होंने बकरीद और सड़कों पर नमाज को लेकर चल रहे विवाद पर बीजेपी के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक 'फालतू और झूठा प्रोपेगैंडा' करार दिया है। इमरान प्रतापगढ़ी ने कड़े लहजे में कहा, "जुमे की नमाज दोपहर में एक से दो बजे के बीच होती है। इस झुलसाने वाली तपती दोपहरी में भला कौन सड़क पर नमाज पढ़ेगा? कोई भी सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ता। बीजेपी इस तरह का फालतू नैरेटिव बनाना और अपनी गंदी राजनीति बंद करे। वे नमाज को छोड़कर यह बताएं कि उन्होंने विकास के नाम पर देश में क्या काम किया है।"
ईंधन की कीमतों और पेट्रोलियम मंत्रालय पर गंभीर आरोप
पेट्रोल-डीजल, एलपीजी (LPG) और सीएनजी (CNG) की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर भी कांग्रेस सांसद ने मोदी सरकार को जमकर घेरा। पेट्रोलियम मंत्रालय की पार्लियामेंट्री कमेटी के सदस्य प्रतापगढ़ी ने कल हुई समिति की बैठक का हवाला देते हुए कहा कि मंत्रालय की तरफ से बढ़ती कीमतों पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, "जब तक राज्यों के चुनाव चल रहे थे, तब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संकट था, लेकिन दाम नहीं बढ़ाए गए। जैसे ही चुनाव खत्म हुए, मोदी सरकार ने अपना चुनावी खर्च वसूलने के लिए महज दो हफ्तों में लगातार करीब 10 रुपये के रेट बढ़ा दिए हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) सस्ता था, तब धन्नासेठों की जेबें भरी गईं और आज जब थोड़ी दिक्कत आई है तो उसका पूरा बोझ डालकर आम जनता को बेरहमी से लूटा जा रहा है।
घुसपैठियों के मुद्दे पर मांगा वास्तविक डेटा
इसके साथ ही इमरान प्रतापगढ़ी ने सरकार के घुसपैठ विरोधी दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने एसआईआर (SIR) का विशेष रूप से जिक्र करते हुए सरकार से पूछा कि इसके माध्यम से अब तक देश में कितने घुसपैठियों की पहचान की गई है, उसका प्रामाणिक डेटा देश के सामने रखना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "बिहार में एसआईआर हुआ, लेकिन सरकार के पास इसका कोई डेटा नहीं है कि वहां कितने घुसपैठिए प्राप्त हुए। बीजेपी के पास दिखाने के लिए कोई वास्तविक आंकड़ा नहीं है, वे सिर्फ और सिर्फ चुनावी भाषणों में इस मुद्दे पर राजनीति करना जानते हैं।"
