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| सदियों बाद भोजशाला में मां वाग्देवी का दर्शन-पूजन: धार में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की 'वाग्देवी लोक' और 'राजा भोज शोध संस्थान' की घोषणा |
धार - मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी धार में आज का दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। गंगा दशहरा के पावन अवसर पर सूबे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राजा भोज की नगरी धार पहुंचे। माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद यह पहला ऐतिहासिक अवसर था जब सूबे के मुखिया ने धार स्थित प्रसिद्ध और प्राचीन भोजशाला परिसर में प्रवेश किया। मुख्यमंत्री ने ज्ञान की देवी मां वाग्देवी (सरस्वती) के पवित्र स्थान पर अत्यंत श्रद्धाभाव के साथ विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य तथा निरंतर उन्नति की कामना की।
इस गौरवमयी अवसर पर आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विक्रम संवत 2083 के इस पावन काल में भोजशाला के दर्शन का यह सौभाग्य सदियों के इंतजार के बाद प्राप्त हुआ है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वास्तव में विक्रम संवत 2082 की वसंत पंचमी से ही धार का इतिहास बदलना प्रारंभ हो गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज पूरा देश “विरासत से विकास” की अवधारणा पर आगे बढ़ रहा है। जैसे सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के आधार पर अयोध्या में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर का निर्माण हुआ, उसी प्रकार मध्य प्रदेश में उच्च न्यायालय के निर्णय के आलोक में भोजशाला में लगभग 750 वर्षों बाद दर्शन का यह ऐतिहासिक अवसर आया है, जिसे धार की जनता ने बेहद सहजता, शांति और आपसी सौहार्द के साथ स्वीकार किया है।
धार के गौरव की पुनर्स्थापना: 'वाग्देवी लोक' और शोध संस्थान की बड़ी घोषणा
भोजशाला के प्राचीन और ऐतिहासिक वैभव को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंच से दो अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी घोषणाएं कीं:
"वाग्देवी लोक" का निर्माण: भोजशाला परिसर में मां वाग्देवी के सम्मान में एक भव्य और दिव्य “वाग्देवी लोक” बनाया जाएगा। इसके अंतर्गत एक अत्याधुनिक पुरातत्व संग्रहालय (म्यूजियम) भी विकसित किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में न केवल सांस्कृतिक चेतना का विस्तार होगा, बल्कि पर्यटन की व्यापक संभावनाएं भी जन्म लेंगी।
"राजा भोज शोध संस्थान" की स्थापना: मालवा और धार के इतिहास, प्राचीन पुरातत्व, लिपि तथा साहित्य के संरक्षण और गहन शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिले में एक उच्च स्तरीय “राजा भोज शोध संस्थान” स्थापित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने राजा भोज के बहुआयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे केवल एक महान योद्धा ही नहीं, बल्कि साहित्य के अप्रतिम संरक्षक, आयुर्वेद के ज्ञाता, उत्कृष्ट जल संरचनाओं के निर्माता और वैज्ञानिक सोच के धनी राजा थे। भोपाल का विशाल तालाब (बड़ा तालाब), भोजपुर मंदिर का अद्वितीय विशाल शिवलिंग और धार का ऐतिहासिक लौह स्तंभ उनकी इसी वैज्ञानिक सोच का जीवंत प्रमाण हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि धार का लौह स्तंभ मूल रूप से दिल्ली के महरौली स्थित लौह स्तंभ से भी ऊँचा था, जिसका निर्माण परमार वंश के दौरान कराया गया था। राजा भोज की वीरता का ही परिणाम था कि उन्होंने चालुक्य राजा तैलप तथा कलचुरी वंश के राजा गांगेयदेव को धूल चटाई, जिससे आज भी भारतीय जनमानस में प्रसिद्ध कहावत “कहां राजा भोज, कहां गांगेय तैलप” जीवंत है।
भोजशाला आंदोलन के शहीदों का सम्मान, परिवारों को ₹5-5 लाख की सहायता
इस भावुक और ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने उन अमर बलिदानियों को नमन किया जिन्होंने भोजशाला की मुक्ति और गौरव के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंच पर शहीदों के परिजनों को सादर आमंत्रित कर उन्हें मां वाग्देवी का स्वरूप, शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। साथ ही मुख्यमंत्री ने तीनों शहीद परिवारों के लिए राज्य सरकार की ओर से 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि देने की सहृदय घोषणा की।
सम्मानित होने वाले शहीदों के परिजन:
शहीद बनसिंह जी की धर्मपत्नी श्रीमती सन्नुबाई अराड़िया (निवासी: अमझेरा)
शहीद अंतरसिंह जी की धर्मपत्नी श्रीमती गुलाबबाई (निवासी: टाण्डा)
शहीद लक्ष्मण सिंह जी के पूज्य पिताजी सालम बाबा (निवासी: ओसारी, पंचघाटी)
₹88.4 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात और हितग्राही लाभ वितरण
धार के चहुंमुखी विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कर-कमलों से जिले को 88.4 करोड़ रुपये लागत के 12 महत्वपूर्ण विकास कार्यों की सौगात मिली। इन कार्यों के भूमिपूजन से धार जिले की आधारभूत संरचना, ग्रामीण विकास, सड़क कनेक्टिविटी और जनसुविधाओं को नया संबल मिलेगा।
इसके साथ ही, विभिन्न सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत चिन्हित हितग्राहियों को मंच से सहायता राशि और प्रमाण पत्र वितरित किए गए:
आजीविका मिशन: धार विकासखंड के ग्राम लाबड़िया निवासी श्रीमती सपना गोविन्द एवं श्रीमती लक्ष्मी बलराम (लक्ष्मी नगर स्व सहायता समूह) को पशुपालन व्यवसाय के विस्तार हेतु 6 लाख रुपये का सीसीएल ऋण प्रदान किया गया।
लाड़ली लक्ष्मी योजना: धार के आबकारी रोड निवासी कु. तानिष्का पिता मांगीलाल को योजना का लाभ पत्र सौंपा गया, जिसके तहत बालिकाओं को कुल 1.43 लाख रुपये एवं छात्रवृत्ति का लाभ सुनिश्चित किया जाता है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम: ग्राम भूतिवावड़ी (तिरला) निवासी 9 वर्षीय बालिका कु. रितिका पिता हरेसिंह को जन्मजात गंभीर हृदय रोग के पूर्णतः निःशुल्क और बेहतर इलाज के लिए 1.60 लाख रुपये की सहायता का प्रमाण पत्र सौंपा गया।
क्रेता-कृषि विकास योजना: तीसगांव निवासी युवा किसान श्री राहुल राठौड़ को कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापित करने के लिए 7,47,009 रुपये की भारी-भरकम अनुदान राशि स्वीकृत की गई।
डेयरी केसीसी लोन: पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए जिला सहकारी बैंक के माध्यम से ग्राम निजामपुरा निवासी श्री नारायणसिंह पटेल को 80 हजार रुपये एवं ग्राम उज्जैनी निवासी श्री पप्पूसिंह सिसोदिया को 1.40 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया।
ऐतिहासिक देवीजी तालाब पर पहुंचे मुख्यमंत्री, फावड़ा चलाकर किया श्रमदान
धार के अपने प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने केवल मंच से भाषण नहीं दिया, बल्कि वे खुद जमीन पर उतरे। प्रदेशव्यापी 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत जल संरक्षण का एक बड़ा और जमीनी संदेश देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव धार के ऐतिहासिक देवी सागर तालाब (देवीजी तालाब) पहुंचे। वहां उन्होंने खुद अपने हाथों में फावड़ा थामकर तालाब परिसर की साफ-सफाई की और गाद हटाने के काम में श्रमदान किया। मुख्यमंत्री को श्रमदान करते देख वहां उपस्थित सैकड़ों नागरिकों और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह छा गया।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने परमार राजाओं और पवार शासकों की प्राचीन जल प्रबंधन प्रणाली की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा, "धार नगर के साढ़े 12 तालाब प्राचीन भारतीय सिविल इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ नमूना हैं। इस प्रणाली में ऊपरी तालाबों का अतिरिक्त पानी स्वतः बहकर इस झील में आता था, जिससे पूरे शहर का जलस्तर बना रहता था।" उन्होंने 12.4560 हेक्टेयर में फैले इस विशाल तालाब को स्वच्छ रखने के लिए स्थानीय निकायों के प्रयासों को सराहा और नागरिकों से आह्वान किया कि जल संरक्षण को एक सरकारी योजना न मानकर अपने बच्चों के भविष्य के लिए एक 'जन-आंदोलन' बनाएं।
नन्हे ताइक्वांडो खिलाड़ियों से आत्मीय संवाद
देवीजी तालाब परिसर में कार्यक्रम के दौरान एक बेहद खूबसूरत दृश्य तब देखने को मिला जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नजर खेल पोशाक (ड्रेस) में सज-धजकर खड़े नन्हे और युवा ताइक्वांडो खिलाड़ियों पर पड़ी। मुख्यमंत्री प्रोटोकॉल तोड़कर सीधे बच्चों के बीच पहुंच गए। उन्होंने बच्चों से बेहद आत्मीयता से बातचीत की, उनके खेल के बारे में पूछा और उनके भीतर छिपे खेल कौशल की सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया, जिससे बच्चों के चेहरे खिल उठे।
हेलीपैड पर हुआ मुख्यमंत्री का भव्य और आत्मीय स्वागत
इससे पूर्व, दोपहर में जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हेलीकॉप्टर धार हेलीपैड पर उतरा, तो वहां उनका अत्यंत भव्य और गरिमापूर्ण स्वागत किया गया। शासन के प्रोटोकॉल के तहत संभाग और जिले के वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और आला प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी अगवानी की।
अगवानी करने वाले प्रमुख जन-प्रतिनिधि और अधिकारी: केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री व क्षेत्रीय सांसद श्रीमती सावित्री ठाकुर, मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास (प्रभारी) मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, धार की क्षेत्रीय विधायक श्रीमती नीना विक्रम वर्मा, धरमपुरी विधायक श्री कालू सिंह ठाकुर, पूर्व विधायक श्री सरदार सिंह मेढ़ा, वरिष्ठ नेता श्री नीलेश भारती, श्रीमती चंचल पाटीदार, इंदौर संभाग के कमिश्नर डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस महानिरीक्षक (IG) श्री अनुराग, धार कलेक्टर श्री राजीव रंजन मीना एवं पुलिस अधीक्षक (SP) श्री सचिन शर्मा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और मीडियाकर्मी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने सभी का हाथ जोड़कर सहर्ष अभिवादन स्वीकार किया।

