| गंगेव में कृषि रथ की धूम: AI, ड्रोन और एग्रीस्टैक जैसी आधुनिक तकनीकों से रूबरू हो रहे किसान Aajtak24 News |
रीवा - मध्य प्रदेश सरकार द्वारा घोषित “कृषक कल्याण वर्ष” 2026 के अंतर्गत रीवा जिले के विकासखंड गंगेव में कृषि रथ अभियान के माध्यम से आधुनिक नवाचारों की अलख जगाई जा रही है। विकासखंड गंगेव की ग्राम पंचायत पचौखर, लालगांव और चौरी में आयोजित कृषि रथ कार्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कृषि सलाह, ड्रोन तकनीक, एग्रीस्टैक (Agristack), रिमोट सेंसिंग और सेंसर आधारित खेती जैसे विषय किसानों के बीच भारी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। कृषि रथ अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित कर वैज्ञानिक व आधुनिक तकनीकों को छोटे से छोटे किसानों तक पहुंचाना है। प्रतिदिन प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर तीन चरणों में ये कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
डिजिटल तकनीक से सशक्त हो रहे छोटे किसान
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित कृषि महाविद्यालय रीवा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुधांशु पांडे ने किसानों को बताया कि भारत आज जलवायु-अनुकूल फसलों, टिकाऊ खेती और तकनीक-संचालित मॉडल के माध्यम से एक नई कृषि क्रांति की ओर बढ़ रहा है। अब एआई (AI) आधारित सलाह, रिमोट सेंसिंग और सेंसर आधारित खेती जैसी तकनीकें छोटे किसानों को भी मौसम, मिट्टी और फसल की स्थिति देखकर बेहतर निर्णय लेने में सक्षम बना रही हैं। उन्होंने खरीफ पूर्व खेत समतलीकरण, जल संरक्षण, पराली प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, फसल विविधीकरण, जैविक व प्राकृतिक खेती के साथ-साथ कीट एवं रोग प्रबंधन पर भी विस्तृत प्रकाश डाला।
'बलराम ई-विकास ऐप' से उर्वरक वितरण में आएगी पारदर्शिता
आत्मा परियोजना के दीपक कुमार श्रीवास्तव (गंगेव) ने किसानों को मध्य प्रदेश सरकार की नई व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया कि किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा उर्वरक वितरण व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और सुविधायुक्त बनाया गया है। इसके लिए शासन ने 'बलराम ई-विकास ऐप' के माध्यम से ई-टोकन उर्वरक वितरण व्यवस्था प्रारंभ की है। इस व्यवस्था के तहत जिले के किसान भाई अपने आधार सत्यापित ओटीपी (OTP) से लॉगिन कर, अपनी इच्छानुसार खाद के फुटकर विक्रेता (रिटेलर) का चयन कर सकते हैं और ई-टोकन जनरेट कर सुगमता से खाद की बोरी प्राप्त कर सकते हैं।
छोटे किसानों के लिए 'इंटीग्रेटेड फार्मिंग' है वरदान
कार्यक्रम के दौरान दीपक कुमार श्रीवास्तव ने छोटे और सीमांत किसानों की आय दोगुनी करने के लिए 'इंटीग्रेटेड फार्मिंग' (एकीकृत कृषि) को सबसे प्रभावी मॉडल बताया। उन्होंने जोर दिया कि किसानों को केवल पारंपरिक फसल उत्पादन पर निर्भर न रहकर इसके साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी, डेयरी, मधुमक्खी पालन, कुक्कुट (मुर्गी) पालन, रेशम पालन और कृषि वानिकी को भी जोड़ना चाहिए।
इस अभियान के दौरान कृषि विभाग की टीम द्वारा कृषकों के खेतों से मिट्टी के नमूने (Soil Samples) एकत्रित करने का कार्य भी किया गया, ताकि उनकी जांच कर सॉइल हेल्थ कार्ड जारी किए जा सकें।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति: इस महत्वपूर्ण जन-जागरूकता कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुधांशु पांडे, कृषि विस्तार अधिकारी युगल किशोर प्रधान, आदर्श पांडे, श्रीमती बबिता साकेत और आत्मा परियोजना से दीपक कुमार श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में स्थानीय प्रगतिशील किसान और ग्रामीण उपस्थित रहे।