| सुकमा; जहां कभी कदम रखने से डरता था सिस्टम, वहां बाइक से पहुंचे कलेक्टर… बस्तर के बदले हालात की बड़ी तस्वीर Aajtak24 News |
सुकमा - बस्तर की पहचान लंबे समय तक कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और नक्सल प्रभाव के कारण चर्चा में रही, लेकिन अब तस्वीर बदलने का दावा किया जा रहा है। सुकमा जिले के दूरस्थ और लंबे समय तक मुख्यधारा से कटे गांवों में प्रशासन का सीधा पहुंचना इसी बदलाव की एक नई कहानी के रूप में सामने आया है। शुक्रवार को सुकमा कलेक्टर श्री अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर ने कोंटा विकासखंड के दूरस्थ गांवों—भेज्जी, मैलासुर, दंतेषपुरम, बुर्कलंका, गछनपल्ली, बोदराजपदर और डब्बाकोंटा का दौरा किया। उबड़-खाबड़ रास्तों और सीमित पहुंच वाले इलाकों में अधिकारियों ने बाइक से पहुंचकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। ग्रामीणों के अनुसार कई क्षेत्रों में पहली बार इतने उच्च स्तर के प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। दौरे का उद्देश्य केवल निरीक्षण नहीं बल्कि विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति समझना और बुनियादी सुविधाओं को गति देना बताया गया।
‘सुशासन परिसर’ मॉडल बना चर्चा का केंद्र
बुर्कलंका में अधिकारियों ने निर्माणाधीन सुशासन परिसर का निरीक्षण किया। इस परिसर को ऐसे मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया जिसमें एक ही परिसर के भीतर स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन, पीडीएस केंद्र और सामुदायिक भवन जैसी सुविधाओं को जोड़ने का प्रयास किया गया है। मैलासुर पंचायत में आयोजित चौपाल में अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर बातचीत की और योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति जानी।
स्कूल, अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाओं पर फोकस
दौरे के दौरान स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े कई निर्णय लिए गए। भेज्जी पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र की प्रशासकीय मंजूरी और मैलासुर में उसके लिए स्थान चिन्हांकन के निर्देश दिए गए। गछनपल्ली में स्वास्थ्यकर्मियों के लिए स्टाफ क्वार्टर की मंजूरी दी गई। शिक्षा क्षेत्र में दंतेषपुरम के प्राथमिक स्कूल भवन को बारिश से पहले पूरा करने और अंदरूनी इलाकों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
पानी, खेती और आजीविका को लेकर बड़े फैसले
ग्रामीणों की मांग पर मैलासुर और दंतेषपुरम में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए तालाब चिन्हांकन और मछली बीज उपलब्ध कराने की बात कही गई। दंतेषपुरम में नए डैम और तालाब निर्माण को मंजूरी देने के साथ पेयजल व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए। मैलासुर और बोदराजपदर में हैंडपंप और बोरिंग स्वीकृत करने तथा जल जीवन मिशन के कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए गए।
अब सड़क बनेगी विकास की असली कड़ी
दौरे के दौरान सबसे बड़ा फोकस सड़क संपर्क पर रहा। बोदराजपदर, मैलासुर, दंतेषपुरम, गछनपल्ली और बुर्कलंका को मुख्य मार्गों से जोड़ने के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए। प्रशासन का मानना है कि सड़क पहुंचने से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक पहुंच आसान होगी। अधिकारियों का कहना है कि बारिश से पहले स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और जल जीवन मिशन से जुड़े कार्यों को समयसीमा में पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. जिन गांवों में पहली बार प्रशासन पहुंचने का दावा किया जा रहा है, वहां अब तक नियमित प्रशासनिक निगरानी क्यों नहीं हो पाई?
2. स्कूल, अस्पताल, सड़क और डैम निर्माण की जो तत्काल मंजूरियां दी गईं, उनके लिए बजट, समयसीमा और जवाबदेही तय की गई है या नहीं?
3. नक्सल प्रभाव कम होने के दावों के बीच इन गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के कौन से ठोस आंकड़े हैं जो बदलाव को साबित करते हैं?