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| रीवा और मऊगंज में अवैध क्लीनिकों का जाल, कचरों के ढेर में तब्दील हो रहा नौनिहालों का भविष्य Aajtak24 News |
रीवा/मऊगंज - मध्यप्रदेश के रीवा और मऊगंज जिलों में इन दिनों स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर नजर आ रही है। ग्रामीण अंचलों में अवैध चिकित्सकों (झोलाछाप डॉक्टरों) का ऐसा मकड़जाल फैल चुका है, जो न सिर्फ लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं, बल्कि पर्यावरण और मासूम बच्चों के भविष्य को भी खतरे में डाल रहे हैं।
झोलाछाप डॉक्टरों का आतंक: मोटरसाइकिल पर 'यमराज' का सफर
दोनों ही जिलों के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में अवैध चिकित्सकों द्वारा बड़ी-बड़ी क्लीनिकें बेखौफ संचालित की जा रही हैं। हद तो तब हो जाती है जब ये कथित डॉक्टर मोटरसाइकिलों पर घूम-घूम कर "सफारी इलाज" बांट रहे हैं। गांव-गांव में 'नामी-गिरामी डॉक्टरों' के बड़े-बड़े बोर्ड और होर्डिंग्स टंगे हैं, लेकिन धरातल पर वे डॉक्टर कभी नजर नहीं आते। ये बोर्ड सिर्फ प्रचार और मरीजों को ठगने का जरिया बनकर रह गए हैं। आश्चर्य की बात यह है कि ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) के पास आज तक इतनी हिम्मत नहीं हुई कि वे इन कथित डॉक्टरों की डिग्रियों और लाइसेंसों की जांच कर सकें।
बायोमेडिकल वेस्ट का खुला आतंक: खतरे में मासूम
नियमों के मुताबिक, किसी भी क्लिनिक या अस्पताल का कचरा (बायोमेडिकल वेस्ट) प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के तहत नष्ट किया जाना चाहिए। लेकिन रीवा और मऊगंज में इन अवैध डॉक्टरों का प्रदूषण कार्यालय से कोई सरोकार ही नहीं है। हाल ही में पुराना राष्ट्रीय राजमार्ग 27 पर जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर, गढ़ चंदन बाग के समीप एक चौंकाने वाला नजारा देखा गया। यहाँ सड़कों के किनारे और खुले मैदानों में इस्तेमाल की जा चुकीं सिरिंज, दवा की खाली कांच की शीशियां, प्लास्टिक की नीडल (सुइयां) और गोलियों के रैपर सरेआम फेंक दिए गए हैं। यह वही जगह है जहाँ स्थानीय छोटे-छोटे बच्चे खेलते हैं। इन नुकीली सुइयों और संक्रामक कचरों के बीच बच्चों का खेलना किसी बड़ी महामारी या हादसे को सीधा आमंत्रण है। दैनिक आज तक 24 इस गंभीर मुद्दे को पूर्व में भी प्रमुखता से प्रकाशित कर चुका है, लेकिन प्रशासनिक अमला कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है।
अपना विभाग बेहाल, दूसरे के विभाग में 'शिलान्यास' की बहार
इस पूरी अव्यवस्था के बीच जनता यह पूछने पर मजबूर है कि आखिर इस पर कार्रवाई कौन करेगा? प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री इन दिनों अपने मूल विभाग को संभालने के बजाय पशु मंत्रालय के कार्यों में अधिक रुचि दिखाते नजर आ रहे हैं। आए दिन हिनौती गांव में उद्घाटनों और शिलान्यासों की एक लंबी श्रृंखला चल रही है। यह मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल की एक अनोखी और हास्यास्पद व्यवस्था को दर्शाता है, जहाँ मंत्री जी अपना खुद का विभाग संभालने में नाकाम हैं, लेकिन दूसरों के विभागों के पत्थरों पर अपना नाम खुदवाने के लिए रोज फीता काट रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वह हर मंत्री को सभी विभागों में काम करने की खुली छूट दे दे, ताकि जिसका जहाँ मन लगे, वह वहीं काम कर ले!
सोशल मीडिया पर रीवा स्वास्थ्य विभाग की 'फजीहत'
रीवा का स्वास्थ्य महकमा इन दिनों काम के लिए कम और सोशल मीडिया पर अपनी फजीहत के लिए ज्यादा चर्चित है। जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की हालत यह हो चुकी है कि वहाँ मरीजों के निशुल्क इलाज के बजाय 'निशुल्क शरीर की मालिश' और 'सीख' (विवाद) आम बात हो चुकी है।
वर्तमान जिला कलेक्टर को इस गंभीर और संवेदनशील मामले का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। गढ़ चंदन बाग के पास बिखरा पड़ा यह मेडिकल कचरा और गांव-गांव में खुले ये मौत के ठेके, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान हैं। देखना यह है कि इस गंभीर रिपोर्ट के बाद भी जिम्मेदार जागते हैं या फिर किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार किया जा रहा है।
