बिलासपुर; जनदर्शन में खुली ज़मीन से ज़िंदगी तक की फाइलें… किसी ने मांगा घर, किसी ने इंसाफ Aajtak24 News

बिलासपुर; जनदर्शन में खुली ज़मीन से ज़िंदगी तक की फाइलें… किसी ने मांगा घर, किसी ने इंसाफ Aajtak24 News

बिलासपुर - जिला कार्यालय में आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में मंगलवार को लोगों की समस्याएं सीधे प्रशासन के सामने पहुंचीं। कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल के निर्देश पर आयोजित जनसुनवाई में अपर कलेक्टर श्री एसएस दुबे ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों की शिकायतें सुनीं और कई मामलों में मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को परीक्षण एवं आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। जनदर्शन में पहुंचे लोगों की मांगें केवल व्यक्तिगत राहत तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि आवास, सामाजिक सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और राजस्व संबंधी मुद्दे भी सामने आए।

किसी को चाहिए घर, किसी को राशन का अधिकार

ग्राम दर्रीघाट की श्रीमती संगीता खांडे ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान की मांग करते हुए बताया कि सीमित आय में किराए के घर में परिवार का पालन-पोषण कठिन हो गया है। वहीं तखतपुर ब्लॉक के परसदा निवासी संतोषी निर्मलकर ने नया बीपीएल राशन कार्ड जारी करने की मांग रखी। उन्होंने बताया कि पूर्व आवेदन के बावजूद अब तक कार्ड नहीं बन पाया है।

भूमि उपयोग से लेकर तालाब संरक्षण तक पहुंचे मुद्दे

पचपेड़ी तहसील के ग्राम गोड़ाडीह निवासी लकेश्वर ने अपनी भूमि के हिस्से को व्यवसायिक उपयोग के लिए डायवर्सन अनुमति देने का आवेदन प्रस्तुत किया। दूसरी ओर ग्राम खमतराई के ग्रामीणों ने गांव के पुराने तालाब पर कथित अतिक्रमण और उसमें गंदगी डाले जाने की शिकायत करते हुए संरक्षण और कार्रवाई की मांग की।

दिव्यांग सहायता और प्राकृतिक आपदा मुआवजा भी बना मुद्दा

कपसिया कला के दिव्यांग सावन कुमार ने ट्राई साइकिल उपलब्ध कराने के लिए आवेदन दिया। वहीं गांधीनगर क्षेत्र की राधा गायकवाड़ और शिवकुमारी यादव ने प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान पर आर्थिक सहायता की मांग की। उन्होंने बताया कि तेज मौसम के दौरान एक बड़ा बरगद का पेड़ उनके घर पर गिर गया, जिससे भारी नुकसान हुआ और वे मरम्मत कराने की स्थिति में नहीं हैं। अपर कलेक्टर ने सभी आवेदनों को सुनकर संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों में से पिछले तीन महीनों में कितने मामलों का वास्तविक समाधान हुआ और कितने अब भी लंबित हैं?

2. प्रधानमंत्री आवास और बीपीएल कार्ड जैसे मामलों में लोग बार-बार आवेदन क्यों कर रहे हैं—क्या पात्रता जांच या प्रक्रिया में कोई व्यवस्थित देरी है?

3. तालाब अतिक्रमण और प्राकृतिक आपदा से नुकसान जैसे मामलों के लिए क्या जिला प्रशासन के पास तय समयसीमा वाला समाधान तंत्र मौजूद है?

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