शहडोल शिक्षा विभाग में 'पांडे जी' का कुर्सी प्रेम या सिस्टम की लाचारी? Aajtak24 News

शहडोल शिक्षा विभाग में 'पांडे जी' का कुर्सी प्रेम या सिस्टम की लाचारी? Aajtak24 News

शहडोल - कहते हैं कि लोकतंत्र में न्यायपालिका का आदेश सर्वोपरि होता है, लेकिन शहडोल शिक्षा विभाग के गलियारों में शायद नियम कुछ और ही इशारा कर रहे हैं। जिला शिक्षा केंद्र में APC (अतिरिक्त परियोजना समन्वयक) के पद पर काबिज अरविंद कुमार पांडे को लेकर मचे बवाल ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। मामला अब केवल विभागीय खींचतान का नहीं, बल्कि हाईकोर्ट के आदेशों की सरेआम अनदेखी का बन गया है।

मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में यह मुद्दा उस समय फिर गर्मा गया जब समाजसेवी और आरटीआई कार्यकर्ता अजय कुमार मोटवानी ने प्रशासन के सामने तीखे सवाल दाग दिए।

हाईकोर्ट ने कहा "Bad in Law", फिर भी कुर्सी से मोह क्यों?

पूरा विवाद नियुक्तियों और प्रभार को लेकर है। समाजसेवी अजय मोटवानी का आरोप है कि माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर ने इस नियुक्ति प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से “Bad in Law” (कानूनन गलत) करार दिया है। कोर्ट ने अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए थे। इतना ही नहीं, विभाग द्वारा दायर की गई पुनर्विचार याचिका (Review Petition) भी कोर्ट ने खारिज कर दी।

हैरानी की बात यह है कि अदालती आदेश के हफ़्तों बाद भी अरविंद पांडे उसी पद पर बने हुए हैं। इसी को लेकर अब शहडोल की जनता और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा आम हो गई है:

"क्या पांडे जी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं, या फिर शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के लिए वह इतने 'प्रिय' बन चुके हैं कि हाईकोर्ट के आदेश भी बेअसर साबित हो रहे हैं?"

वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप

जनसुनवाई में दिए गए आवेदन में केवल पद पर बने रहने की ही शिकायत नहीं है, बल्कि वित्तीय गड़बड़ी की आशंका भी जताई गई है। मोटवानी का आरोप है कि जब अदालत ने नियुक्ति को ही गलत बता दिया, तो उस आदेश के बाद भी संबंधित अधिकारी द्वारा वित्तीय दस्तावेजों और चेकों पर हस्ताक्षर कैसे किए जा रहे हैं? यह सीधे तौर पर राजकीय कोष के दुरुपयोग और कानूनी प्रक्रिया के उल्लंघन का मामला प्रतीत होता है।

प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठते सवाल

यह मामला अब शहडोल जिला प्रशासन की साख पर भी सवाल खड़ा कर रहा है। यदि जिले के जिम्मेदार अधिकारी ही न्यायालयीन आदेशों का पालन कराने में विफल रहते हैं, तो आम जनता में क्या संदेश जाएगा?

समाजसेवी अजय कुमार मोटवानी की मुख्य मांगें:

  1. हाईकोर्ट के आदेश का तत्काल पालन करते हुए संबंधित अधिकारी को पदमुक्त किया जाए।

  2. आदेश आने के बाद किए गए तमाम वित्तीय लेनदेन और हस्ताक्षरों की उच्च स्तरीय जांच हो।

  3. अदालती आदेश की अवहेलना करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जनता की नजरें प्रशासन पर

शहडोल में यह चर्चा का विषय है कि आखिर वह कौन सी 'अदृश्य शक्ति' है जो नियमों और अदालती आदेशों के ऊपर जाकर एक अधिकारी को संरक्षण दे रही है। क्या प्रशासन इस बार जनसुनवाई में आए इस गंभीर मामले पर कड़ा रुख अपनाएगा, या फिर 'पांडे जी' की कुर्सी इसी तरह सुरक्षित रहेगी?

फिलहाल, गेंद प्रशासन के पाले में है। अब देखना यह होगा कि कलेक्टोरेट से इस मामले में क्या निर्देश जारी होते हैं और शिक्षा विभाग अपनी 'प्रियता' छोड़कर कानून का साथ कब देता है।

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