सतना; गर्मी, पानी और सरकार की चेतावनी: अब हर दिन होगा पेयजल संकट का हिसाब Aajtak24 News

सतना; गर्मी, पानी और सरकार की चेतावनी: अब हर दिन होगा पेयजल संकट का हिसाब Aajtak24 News

सतना - प्रदेश में बढ़ती गर्मी और संभावित जल संकट को देखते हुए राज्य स्तर पर पेयजल व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए जिलों को दैनिक निगरानी और त्वरित समाधान की व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेयजल व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रशासनिक समन्वय के साथ समस्याग्रस्त क्षेत्रों में तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि जिलों में कंट्रोल रूम बनाकर संचार व्यवस्था मजबूत की जाए और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई हो।

मुख्य सचिव ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया कि वे प्रतिदिन पेयजल संबंधी स्थिति की समीक्षा करें और सीएम हेल्पलाइन सहित अन्य माध्यमों से प्राप्त शिकायतों का समयसीमा में निराकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी कहा कि पेयजल व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के अवकाश पर नियंत्रण रखा जाए ताकि आपूर्ति प्रभावित न हो। शहरी क्षेत्रों में टैंकर से जल आपूर्ति होने की स्थिति में जनप्रतिनिधियों को जानकारी देने और किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को रोकने के निर्देश दिए गए। जहां आवश्यकता हो वहां निजी जल स्रोतों का भी उपयोग करने की बात कही गई।

ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत और पीएचई विभाग को संयुक्त जिम्मेदारी के साथ काम करने को कहा गया। बसाहटवार मैपिंग, खराब हैंडपंपों की मरम्मत, राइजर पाइप बढ़ाने और उपलब्ध पंचायत निधि का उपयोग पेयजल कार्यों में प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए गए। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि नल-जल योजनाओं की बिजली आपूर्ति बाधित न हो और सिंगल फेज ट्यूबवेल की व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित होती रहे। संभागीय आयुक्तों को भी नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए।

सतना के एनआईसी कक्ष में आयोजित इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस, आयुक्त नगर निगम शेर सिंह मीना, जिला पंचायत सीईओ शैलेन्द्र सिंह, डिप्टी कलेक्टर संदीप परस्ते सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. रोजाना समीक्षा और कंट्रोल रूम के निर्देश पहले भी दिए जाते रहे हैं—क्या इस बार ऐसे जिलों की जवाबदेही तय होगी जहां हर साल पेयजल संकट दोहराया जाता है?

2. यदि पंचायत निधि का उपयोग पेयजल कार्यों में किया जाएगा, तो क्या अन्य विकास कार्य प्रभावित होंगे और उसके लिए कोई अलग वित्तीय व्यवस्था है?

3. निजी जल स्रोतों के उपयोग की बात कही गई है—क्या इसके लिए कोई पारदर्शी नीति बनाई गई है ताकि भुगतान, गुणवत्ता और पहुंच को लेकर विवाद न हो?

Post a Comment

Previous Post Next Post