आलीराजपुर; 34 सवाल, घर-घर डिजिटल एंट्री और कलेक्टर खुद मौके पर Aajtak24 News

आलीराजपुर; 34 सवाल, घर-घर डिजिटल एंट्री और कलेक्टर खुद मौके पर Aajtak24 News

आलीराजपुर - जिले में जनगणना का पहला चरण अब पूरी तरह डिजिटल मोड में आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्रीमती नीतू माथुर ने कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में पहुंचकर जनगणना कार्य का औचक निरीक्षण किया और अपनी मौजूदगी में मकानों की ऑनलाइन गणना कराई। यह निरीक्षण केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं रहा, बल्कि डिजिटल जनगणना प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति को समझने की कोशिश के रूप में सामने आया।

कलेक्टर की मौजूदगी में हुई ऑनलाइन गणना

निरीक्षण के दौरान प्रगणक ने एक परिवार से जनगणना से जुड़े 34 सवाल पूछे और उनकी जानकारी ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज की।

कलेक्टर ने मौके पर देखा कि—

  • जानकारी सही तरीके से ली जा रही है या नहीं
  • डिजिटल एंट्री में कोई तकनीकी समस्या तो नहीं
  • नागरिकों को प्रक्रिया समझाई जा रही है या नहीं

जनगणना के पहले चरण में क्या-क्या जानकारी ली जा रही है?

इस चरण में मकान सूचीकरण और मकान गणना का काम किया जा रहा है। इसमें शामिल हैं—

  • मकान की स्थिति और स्वामित्व
  • परिवार प्रमुख की जानकारी
  • कमरों की संख्या
  • पेयजल और शौचालय सुविधा
  • बिजली और इंटरनेट उपलब्धता
  • मोबाइल, टीवी, लैपटॉप जैसी सुविधाएं
  • रसोई और ईंधन व्यवस्था
  • वाहन और खाद्यान्न उपयोग की जानकारी

यानी यह जनगणना अब केवल आबादी गिनने तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइल तैयार करने की प्रक्रिया बन चुकी है।

डिजिटल जनगणना पर प्रशासन का जोर

ऑनलाइन एंट्री के जरिए सरकार—

  • डेटा संग्रहण को तेज
  • त्रुटि रहित रिकॉर्ड
  • और योजनाओं के लिए सटीक आधार तैयार करना

चाहती है।

कलेक्टर की जनता से अपील

कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर ने जिलेवासियों से अपील की कि—

  • प्रगणकों को सही और सटीक जानकारी दें
  • जनगणना में सहयोग करें
  • जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी

यह निरीक्षण क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?

कट्ठीवाड़ा जैसे आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में डिजिटल जनगणना की प्रक्रिया को लेकर कई व्यावहारिक चुनौतियां हैं। ऐसे में कलेक्टर का फील्ड में जाकर निरीक्षण करना प्रशासन की गंभीरता को दर्शाता है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में इंटरनेट व तकनीकी संसाधनों की सीमाओं के बीच ऑनलाइन जनगणना की सटीकता और निरंतरता कैसे सुनिश्चित की जा रही है?

2. नागरिकों से जुटाई जा रही इतनी विस्तृत डिजिटल जानकारी की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा के लिए क्या मजबूत तंत्र मौजूद है?

3. क्या प्रगणकों को इतने व्यापक सामाजिक-आर्थिक डेटा संग्रह के लिए पर्याप्त तकनीकी प्रशिक्षण और फील्ड सपोर्ट दिया गया है?


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