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| रीवा में अवैध कॉलोनाइजरों पर 'कलेक्टर का हंटर': बीहर नदी की धारा रोकने वालों पर FIR के आदेश Aajtak24 News |
रीवा - रीवा जिले में अवैध कॉलोनाइजिंग और बिना अनुमति के भूखंडों की बंदरबांट करने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा मोर्चा खोल दिया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्रीमती प्रतिभा पाल ने कड़ा रुख अपनाते हुए दो अलग-अलग मामलों में अवैध कॉलोनी विकसित करने वालों के विरुद्ध एफआईआर (FIR) दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई से भू-माफियाओं और अवैध प्लॉटिंग करने वालों में हड़कंप मच गया है।
केस 1: बीहर नदी के अस्तित्व से खिलवाड़ और 'शांति रॉयल स्टेट' का फर्जीवाड़ा
पहला और सबसे गंभीर मामला मेसर्स शांति इंफ्रास्ट्रक्चर एवं शांति विलास इंफ्रा प्रोजेक्ट से जुड़ा है। इसके संचालक उपेन्द्र सिंह पर आरोप है कि उन्होंने बिना किसी वैध कॉलोनाइजर लाइसेंस और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के, बीहर नदी के किनारे 'शांति रॉयल स्टेट' नाम से कॉलोनी विकसित करना शुरू कर दिया।
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि बिल्डर ने एनजीटी (NGT) के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बीहर नदी के बहाव क्षेत्र में मिट्टी और मलबा डालकर प्राकृतिक प्रवाह को बाधित करने की कोशिश की। इतना ही नहीं, मढ़ी और करहिया के प्राकृतिक नालों के स्वरूप को बदलकर उन्हें संकरा कर दिया गया, जिससे भविष्य में शहर में जलभराव और भीषण बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है। हैरानी की बात यह है कि इस अवैध निर्माण के लिए केवल ग्राम पंचायत के सरपंच से एनओसी (NOC) ली गई, जबकि कानूनन यह अधिकार केवल कलेक्टर के पास सुरक्षित है।
केस 2: कृषि भूमि पर पक्के मकान और सेटेलाइट इमेज से खुला राज
दूसरा मामला शाहीन बेगम और अमरीन अंसारी से संबंधित है। यहाँ भी बिना लाइसेंस और बिना डायवर्जन के अवैध प्लॉटिंग और कॉलोनी निर्माण का खेल चल रहा था। बीहर नदी के अपवाह क्षेत्र में अतिक्रमण कर पर्यावरण को नुकसान पहुँचाया गया। जांच के दौरान जब सेटेलाइट इमेज खंगाली गई, तो बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। कागजों में जिस जमीन को 'कृषि भूमि' बताया गया था, वहां असलियत में पक्के मकान खड़े नजर आए। यह सीधे तौर पर शासन के साथ धोखाधड़ी और राजस्व नियमों का उल्लंघन है।
जेल की हवा खाएंगे दोषी, 3 से 7 साल तक की सजा का प्रावधान
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने इन दोनों मामलों में मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 2013 की धारा 61-घ के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के सख्त निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 172 के तहत दोषियों को 3 से 7 साल तक की कठोर सजा और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासन का 'मास्टर प्लान': 4 सदस्यीय टीम करेगी बारीकी से जांच
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि इन अवैध कॉलोनियों को अब सरकार अपने नियंत्रण में ले सकती है। मामले की गहराई से जांच के लिए एक 4 सदस्यीय हाई-लेवल टीम गठित की गई है। इस टीम में:
एसडीएम (हुजूर)
नगर एवं ग्राम निवेश (T&CP) के अधिकारी
लोक निर्माण विभाग (PWD) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
इस टीम को एक महीने के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, तहसीलदार को आदेश दिया गया है कि तीन दिन के भीतर भू-अभिलेख अपडेट करें और एक सप्ताह के अंदर कब्जे की वास्तविक रिपोर्ट पेश करें।
