रीवा-मऊगंज: रबी खरीदी की 'बिसात' तैयार, पर पारिदर्शिता 'लापता'; केंद्रों के चयन में 'सेवा शुल्क' का खेल? Aajtak24 News

रीवा-मऊगंज: रबी खरीदी की 'बिसात' तैयार, पर पारिदर्शिता 'लापता'; केंद्रों के चयन में 'सेवा शुल्क' का खेल? Aajtak24 News

रीवा/मऊगंज  - मध्य प्रदेश के विन्ध्य क्षेत्र में रबी सीजन 2026-27 के लिए गेहूं, चना, मसूर और राई की सरकारी खरीदी का बिगुल बज चुका है। लेकिन विडंबना देखिए कि खरीदी शुरू होने से पहले ही 'केंद्र निर्धारण' की प्रक्रिया भ्रष्टाचार और रसूखदारों की 'सिफारिश' के दलदल में फंसती नजर आ रही है। जिले की गलियों से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक एक ही चर्चा है—क्या केंद्रों का चयन किसानों की सुविधा के लिए हो रहा है या 'खास' लोगों की जेब भरने के लिए?

आधी-अधूरी सूची: दाल में काला या पूरी दाल ही काली?

रीवा जिले की 9 तहसीलों के लिए अब तक केवल 59 केंद्रों की सूची जारी करना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करता है। जानकारों का सवाल है कि जब जिले को कहीं अधिक केंद्रों की आवश्यकता है, तो शेष केंद्रों को 'होल्ड' पर क्यों रखा गया है? आरोप लग रहे हैं कि पर्दे के पीछे उन दागी समितियों को भी केंद्र बनाने की 'सेटिंग' चल रही है, जो पिछले वर्षों में घोटालों के लिए ब्लैकलिस्टेड रही हैं या जहाँ पर्याप्त स्टाफ तक नहीं है।

भ्रष्टाचार का 'ट्रायंगल': तौल, परिवहन और भंडारण

उपार्जन प्रक्रिया में भ्रष्टाचार केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर इसके तीन मुख्य पड़ाव हैं:

  1. तौल में सेंधमारी: सरकारी धर्मकांटों और निजी कांटों के बीच प्रति ट्रक 2 से 4 क्विंटल का अंतर आना अब 'परंपरा' बन चुका है। यह सीधा डाका किसान की मेहनत और सरकारी खजाने पर है।

  2. रास्ते में 'गायब' होता अनाज: गोदामों तक पहुँचने से पहले ही ट्रकों से अनाज की चोरी की खबरें आम हैं, जिसे बाद में 'नमी' या 'शॉर्टेज' का नाम देकर दबा दिया जाता है।

  3. दागी समितियों का दबदबा: रसूखदार नेताओं के संरक्षण में चलने वाली समितियां जांच के घेरे में होने के बावजूद दोबारा केंद्र हथियाने की फिराक में हैं।

जांच का 'मायाजाल': फाइलें मोटी, नतीजे शून्य

रीवा और मऊगंज में हर साल करोड़ों के गबन की शिकायतें होती हैं। विडंबना यह है कि शिकायतों का अंबार तो लगा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल 'फाइल-फाइल' का खेल खेला जाता है। किसी बड़े अधिकारी या माफिया पर ठोस कार्रवाई न होना यह सिद्ध करता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं।

विन्ध्य की जनता का सवाल: क्या सीएम और कमिश्नर लेंगे संज्ञान?

क्या संभागायुक्त और जिला प्रशासन इन अव्यवस्थाओं की गोपनीय जांच कराएंगे? क्या मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 'भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश' के संकल्प को रीवा के अधिकारी जमीन पर उतारेंगे? किसान अपनी उपज बेचने के लिए तैयार है, लेकिन वह यह भी देख रहा है कि उसकी मेहनत की कमाई किन बिचौलियों की भेंट चढ़ने वाली है।

Post a Comment

Previous Post Next Post