शिक्षा के मंदिर' में भ्रष्टाचार का घुन: रीवा-मऊगंज में स्कूलों के रखरखाव की राशि डकार रहा सिस्टम Aajtak24 News

शिक्षा के मंदिर' में भ्रष्टाचार का घुन: रीवा-मऊगंज में स्कूलों के रखरखाव की राशि डकार रहा सिस्टम Aajtak24 News

मऊगंज - रीवा और मऊगंज जिले के सरकारी स्कूलों से एक ऐसी तस्वीर सामने आ रही है जो शिक्षा व्यवस्था और प्रशासन के दावों की पोल खोलती है। देश का भविष्य कहे जाने वाले बच्चों को बेहतर तालीम देने के नाम पर सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन धरातल पर यह राशि बच्चों की सुविधा के बजाय 'सिस्टम' की भेंट चढ़ रही है।

कंटर्जेंसी राशि में बंदरबांट का खेल

सरकारी स्कूलों के बेहतर संचालन और समय-समय पर मरम्मत के लिए शासन द्वारा 'कंटर्जेंसी राशि' जारी की जाती है। लेकिन जिले के कई विद्यालयों की जमीनी हकीकत बताती है कि इस राशि का उपयोग केवल कागजों पर ही हो रहा है। स्कूलों के भवन रखरखाव के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। भवनों में बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं, प्लास्टर गिर रहे हैं और बारिश के मौसम में छतें टपकती हैं। इसके बावजूद, जिम्मेदार अधिकारी इस लूट पर आंखें मूंदे बैठे हैं।

बाहर की दीवारों पर पुताई, अंदर बदहाली की कहानी

भ्रष्टाचार का सबसे शर्मनाक उदाहरण नगर परिषद नईगढ़ी क्षेत्र के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय महावीरपुर में देखने को मिला। यहाँ विद्यालय प्रबंधन ने 'दिखावे' के लिए भवन की बाहरी दीवारों पर तो पुताई करा दी है, ताकि ऊपर से सब ठीक लगे, लेकिन अंदर का नजारा किसी डरावने खंडहर जैसा है। कक्षाओं के अंदर की दीवारों को वर्षों से चूना-पानी तक नसीब नहीं हुआ है। फर्श टूटे हुए हैं और छतें जर्जर हो चुकी हैं, जिससे यहाँ पढ़ने वाले बच्चों की जान हमेशा जोखिम में रहती है।

लिफाफे के दम पर रुक जाती है जांच

सूत्रों की मानें तो स्कूलों के ऑडिट और जांच के दौरान केवल खानापूर्ति की जाती है। रोकड़ बही (Cash Book) की जांच के समय 'लिफाफा संस्कृति' के दम पर गलत को सही साबित कर दिया जाता है। यही कारण है कि विद्यालय प्रबंधन और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच चल रहे इस खेल के कारण सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है और स्कूलों की सूरत बिगड़ती जा रही है।

भौतिक सत्यापन की उठ रही मांग

क्षेत्र के समाजसेवियों और अभिभावकों ने कलेक्टर रीवा एवं मऊगंज से मांग की है कि जिले के सभी सरकारी स्कूलों का एक उच्च स्तरीय टीम के माध्यम से 'भौतिक सत्यापन' कराया जाए। यदि निष्पक्ष जांच हुई, तो कंटर्जेंसी राशि में हुए बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा होना तय है। लोगों का कहना है कि जर्जर भवनों की तत्काल मरम्मत कराई जाए और दोषियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

संकुल प्राचार्य का पक्ष: "राशि ही कम मिलती है"

इस पूरे मामले पर शासकीय कन्या हायर सेकंडरी विद्यालय नईगढ़ी के संकुल प्राचार्य मनोज कुमार मिश्रा का कहना है कि सरकार द्वारा जितनी कंटर्जेंसी राशि प्रदान की जाती है, उतने का ही कार्य कराया जाता है। उनके अनुसार, रखरखाव के लिए मिलने वाली राशि पर्याप्त नहीं होती, जिसके कारण विद्यालयों के हालात ऐसे हैं।

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