रिश्वत लेते PWD के प्रभारी मुख्य अभियंता लोकायुक्त के हत्थे चढ़े, सहयोगी भी गिरफ्तार

रिश्वत लेते PWD के प्रभारी मुख्य अभियंता लोकायुक्त के हत्थे चढ़े, सहयोगी भी गिरफ्तार

रीवा - लोक निर्माण विभाग (PWD) में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की टीम ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए रीवा के प्रभारी मुख्य अभियंता कैलाश कुमार लच्छे को कथित रूप से रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। कार्रवाई के दौरान उनके सहयोगी धर्मवीर भारती को भी लोकायुक्त टीम ने गिरफ्तार किया है। दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। कार्रवाई देर शाम तक जारी रही।

लोकायुक्त की कार्रवाई सिविल लाइन कॉलोनी स्थित डी-7 शासकीय आवास में की गई। बताया गया कि यहीं शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम लिए जाने की कार्रवाई हुई। लोकायुक्त की कार्रवाई की जानकारी सामने आते ही विभागीय और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई।

टेस्टिंग कार्य बंद होने के बाद रिश्वत मांगने का आरोप

लोकायुक्त से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मामले की शिकायत सोनू सिंह, जो सतना स्थित एक टेस्टिंग लैब के मैनेजर बताए जा रहे हैं, ने की थी। शिकायतकर्ता की फर्म द्वारा विभिन्न शासकीय एवं निजी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता परीक्षण संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

शिकायत के अनुसार उनकी फर्म द्वारा लोक निर्माण विभाग के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता संबंधी टेस्टिंग का काम किया जा रहा था। प्रभारी मुख्य अभियंता के रूप में कैलाश कुमार लच्छे की पदस्थापना के बाद कथित रूप से टेस्टिंग का काम बंद हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने दोबारा काम शुरू कराने और टेस्टिंग कार्य जारी रखने के संबंध में संपर्क किया। आरोप है कि इसी दौरान शिकायतकर्ता से प्रतिमाह एक लाख रुपये रिश्वत की मांग की गई। शिकायतकर्ता ने मामले की जानकारी लोकायुक्त को दी, जिसके बाद कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई।

4 अगस्त को लोकायुक्त में की गई शिकायत

मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने 4 अगस्त को लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने शिकायत का सत्यापन कराया। अधिकारियों के अनुसार सत्यापन के दौरान रिश्वत की मांग किए जाने की पुष्टि हुई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक आरोपी प्रभारी मुख्य अभियंता द्वारा अपने सहयोगी धर्मवीर भारती के माध्यम से शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम लेने की बात सामने आई। बताया गया कि कुछ राशि पहले दी गई थी और शेष रकम बाद में दिए जाने की बात थी।

शासकीय आवास पर बिछाया गया जाल

शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने ट्रैप की योजना बनाई। कार्रवाई का नेतृत्व डीएसपी रवींद्र सिंह परिहार द्वारा किए जाने की जानकारी सामने आई है। योजना के अनुसार शिकायतकर्ता को शेष रिश्वत की रकम लेकर आरोपी के शासकीय आवास पर भेजा गया। जैसे ही शिकायतकर्ता द्वारा कथित रूप से रिश्वत की रकम आरोपी पक्ष को सौंपी गई, वहां पहले से मौजूद लोकायुक्त की टीम ने कार्रवाई करते हुए प्रभारी मुख्य अभियंता कैलाश कुमार लच्छे और उनके सहयोगी धर्मवीर भारती को पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान रिश्वत की रकम की बरामदगी सहित अन्य कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला

लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। टीम द्वारा आरोपियों से पूछताछ के साथ ही संबंधित दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा होने की उम्मीद है। यह भी जांच का विषय है कि क्या पूरे मामले में PWD के अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी किसी तरह जुड़े हुए हैं। फिलहाल इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

रीवा-मऊगंज में लगातार कार्रवाई से उठ रहे सवाल

लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद रीवा और नवीन मऊगंज जिले में विभिन्न विभागों में कथित भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। आम लोगों का आरोप है कि राजस्व, कृषि, पंचायत, खनिज, आबकारी और पुलिस सहित विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। अतिक्रमण हटाने से लेकर अतिक्रमण से जुड़े मामलों, सरकारी योजनाओं, निर्माण कार्यों और विभागीय कामकाज तक में रिश्वतखोरी के आरोप लगाए जाते रहे हैं।

बार-बार लोकायुक्त की कार्रवाई सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि विभागीय स्तर पर भ्रष्टाचार रोकने की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा। यदि लोकायुक्त को लगातार शिकायतों के आधार पर ट्रैप कार्रवाई करनी पड़ रही है, तो संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी अपने स्तर पर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए कितनी प्रभावी निगरानी कर रहे हैं, यह भी विचारणीय विषय है।

हालांकि, किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। समाचार का उद्देश्य किसी संस्था या व्यक्ति विशेष की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि सामने आई कार्रवाई और उससे जुड़े जनसरोकार एवं जनआक्रोश के मुद्दों को जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाना है। रीवा में लगातार सामने आ रही लोकायुक्त कार्रवाइयों के बीच अब जरूरत इस बात की है कि शासन और विभागीय अधिकारी भ्रष्टाचार की शिकायतों पर केवल कार्रवाई का इंतजार करने के बजाय अपने स्तर पर भी प्रभावी निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था मजबूत करें।

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